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विधानसभा के सत्र का जो मजाक हुआ है, वो सारा देश देखेगा: गुलाबचंद कटारिया
January 24, 2020 • Dr. Surendra Sharma


उपमुख्यमंत्री को माफी मांगनी चाहिये: राजेन्द्र राठौड़
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जयपुर, 23 जनवरी। जयपुर...15वीं विधानसभा का चैथा सत्र शुक्रवार से शुरू होने जा रहा है, जिसके चलते सदन के अंदर विपक्ष की ओर से कांग्रेस सरकार को घेरने हेतु गुरूवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की अलग बैठक बुलाई गई।
बैठक की अध्यक्षता नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने की, तो वहीं बैठक में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां, राष्ट्रीय सह-संगठन प्रभारी वी. सतीश, प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ भी मौजूद रहे।
विधायक दल की बैठक के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और राजस्थान विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया मीडिया से रूबरू हुए। उन्होंने कहा कि सरकार की सबसे बड़ी असफलता का धोतक है कल का विधानसभा सत्र को बुलाना है। एससी एसटी आरक्षण 12 दिसंबर को ही लोकसभा और राज्यसभा में पारित कर दिया गया था। इसमें आधे राज्यों की सहमति आवश्यक होती है और वो सहमति दुर्भाग्य से राजस्थान की सरकार और राजस्थान का प्रशासनिक तंत्र नहीं दे पाया। जिसकों शब्दों में क्या कहूँ, निर्लजता का काम किया है। इसकी 25 जनवरी 2020 तक की समय अवधि है। क्या राज्य सरकार इसको 15 दिन पहले नहीं कर सकती थी क्या राजस्थान की कांग्रेस सरकार नींद में थी जिसके कारण विधानसभा की सारी परम्पराओं को ताक में रखा गया और अब आनन फानन में सत्र बुलाया गया है।

उन्होंने कहा कि एससी एसटी आरक्षण की समय अवधि 25 जनवरी 2020 से 10 साल बढ़ाकर 2030 तक कर दिया गया है। इसके बारे में जो राय देनी थी उसकी अंतिम सीमा 25 जनवरी है। दुर्भाग्य से नींद में सोई सरकार को, अचानक कहीं से इसके बारे में जानकारी मिली। अगर 25 तारीख को हम इस पर अपनी सहमति नहीं देंगे तो राजस्थान का एससी एसटी वर्ग हमारे बारे में यह सोचेगा की राजस्थान सरकार हमारे लिए गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारी केंद्र सरकार को राजनीति के चक्कर में आरोप प्रत्यारोप करते रहते हैं। 2 अप्रेल 2018 में जो घटना हुई थी उसको लेकर अनाप-शनाप बातें की गई, लेकिन इसको लेकर इनको केवल सहमति देनी थी वह भी समय पर नहीं किया गया। इस कारण 24 तारीख को आनन फानन में सत्र बुलाया गया।
कटारिया ने कहा कि राज्यपाल का अभिभाषण का सत्र 21 दिन के नोटिस पर बुलाया जाता है लेकिन इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि इतने कम नोटिस पर सत्र आहूत किया गया है। कुछ अपवाद को छोड़कर इस तरह का सत्र नहीं बुलाया जाता है। विधायकों को इसी 21 दिन के अंदर अपने प्रश्नों को तैयार करने का समय मिलता है और ना तो विधायक प्रश्नों की तैयारी कर पाए और ना ही सरकार राज्यपाल के अभीभाषण की तैयारी कर पाई।
कटारिया ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण को सभी विभागों के साथ बैठकर के उसका एक-एक डिपार्टमेंट के लिए हुए कार्यों को सम्मिलित करते हुए भाषण की तैयारी करता है। उन्होंने क्या तैयारी की होगी ये तो भगवान ही जानें और किसने इसको देखा होगा और किसने नहीं जो लिख दिया वो फाइनल। इस विधानसभा के सत्र का जो मजाक हुआ है वो सारा देश देखेगा के वास्तव में कितने चर्तुर और अच्छे लोग हैं जो समय की मर्यादा को भी नहीं समझते हैं।
उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को कटघरे में खड़ा करते हुये कहा कि विधानसभा से सम्बन्धित वक्तव्य कार्य सलाहकार समिति तय करती है कि सदन कब तक चलेगा और उसका प्रतिवेदन जब सदन में मंजूरी के लिये आता है, उसके मंजूर होने के बाद वो सार्वजनिक होता है। इससे पहले भी जब कई बार कार्य सलाहकार समिति ने कोई बात बाहर की है, तो उसे माफी मांगनी पड़ी है। सचिन पायलट को इसका ज्ञान नहीं है, मैं यह मांग करूंगा कि उपमुख्यमंत्री इसके लिये माफी मांगे।
राठौड़ ने कहा कि सरकार आनन-फानन के अन्दर सारे नियम प्रक्रियों को तोड़ते हुये सिर्फ चार दिन के नोटिस पर बजट सत्र को प्रारम्भ कर रहीं है, इससे बड़ा दुर्भाग्य कुछ हो नहीं सकता। जो भी विधानसभा मंे असंवैधानिक नियम और प्रक्रियाओं के विपरित होगा और सरकार अपने बहुमत के आधार पर हठधर्मिता करना चाहेगी, तो भाजपा विधायक दल इसका पुर्जोर विरोध करेगा।
राठौड़ ने कहा कि यह सिर्फ राहुल गांधी को दिखाने के लिये आनन-फानन में सत्र बुलाया जा रहा है। नागरिकता संशोधन कानून सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधिन है, उस पर भी एक संकल्प लाकर यह सिद्ध करना चाहते है कि इनके जो नोसिखिया राष्ट्रीय नेता चाहते है उसी को राजस्थान विधानसभा में पारित करवाकर विधानसभा की परमराओं को और इतिहास को कलंकित करना चाहते है, इसको भाजपा कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।