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तारीख टलेगी. फांसी नहीं- दुष्कर्मियों को कल सुबह होने वाली फांसी टली, कोर्ट ने कहा... देश की अदालतें आंख मूंदकर किसी दोषी से भेदभाव नहीं कर सकती
February 1, 2020 • Dr. Surendra Sharma

एजेंसी

नई दिल्ली। निर्भया के गुनहगारों को डेथ वॉरंट के हिसाब फरवरी को सुबह 6 बजे फांसी लटकाया जाए या नहीं। इस पटियाला हाउस कोर्ट ने आदेश तक रोक लगा दी है। दोषियों में शामिल अक्षय ठाकुर, पवन और विनय शर्मा की याचिका सुनवाई के दौरान तिहाड प्रशासन कहा- चार दोषियों में से विनय की दया याचिका राष्ट्रपति पास लंबित है। ऐसे में दोषियों अलग-अलग फांसी दे सकते तीन दोषियों मुकेश, पवन अक्षय को 1 फरवरी को फांसी लटकाया जा सकता है। हालांकिकोर्ट ने कहा कि इस देश अदालतें कानूनी उपायों में किसी भी दोषी से आंख मूंदकर भेदभाव नहीं कर सकतीं। सिंह ने कहा कि एक दोषी याचिका लंबित होने से दोषियों को फांसी देना गैर-कानूनी होगा। उन्होंने गुरुवार को भी से 1 फरवरी को फांसी पर लगाने की मांग की थी। इसके दिल्ली प्रिजन मैनुअल का हवाला दिया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि अभी दोषियों के पास याचिका समेत कानूनी विकल्प इस पर अदालत ने तिहाड़ प्रशासन से स्टेटस रिपोर्ट मांगी पटियाला हाउस कोर्ट ने जनवरी को दूसरा डेथ वॉरंट जारी के पहले डेथ वॉरंट में फांसी की किया था। इससे पहले 7 जनवरी तारीख 22 जनवरी तय की गई थी।

फांसी की सजा में दोषियों के लिए प्रावधान बदलने की याचिका पर सुनवाई होगी इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए राजी हो गया है। सरकार ने 2014 के सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले में बदलाव की मांग की, जिसमें दया याचिका खारिज होने के 14 दिन बाद ही फांसी देने की व्यवस्था दी गई थी। याचिका में गृह मंत्रालय ने कहा- मौत की सजा पर क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल करने के लिए समय सीमा तय की जाए। डेथ वॉरंट मिलने के बाद 7 दिन में ही दया याचिका लगाने का नियम रहे। दया याचिका खारिज होने के बाद 7 दिन में डेथ वॉरंट और अगले 7 दिन में फांसी हो, भले ही बाकी दोषियों की कोई भी याचिका लंबित हो।

चारों दोषियों की मौजूदा स्थिति मुकेश सिंह के सभी विकल्प (क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका) खत्म हो चुके हैं। दोषी पवन गुप्ता के पास अभी दोनों विकल्प क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका बचे हैं। दोषी अक्षय ठाकुर की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज, दया याचिका का विकल्प बचा है। दोषी विनय शर्मा की क्यूरेटिव पिटीशन पहले ही खारिज हो चुकी है। उसने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी।