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सफलता का मूल मन्त्र है सुन्दर कांड पाठ-धर्मरस धारा
February 22, 2020 • Dr. Surendra Sharma

सुंदरकांड के पाठ के महत्व - 

सुंदर कांड पाठ के इतने लाभ हैं जिन्हें वर्णित नही किया जा सकता, मूल भाव इसी से समझा जा सकता है कि

' राम काज कीन्हे बिनु मोहि कहाँ विश्राम'

अर्थात किसी भी कार्य को किये विना विश्राम वर्जित है, यानी तब तक मेहनत करते रहो जब तक कार्य सिद्ध न हो.. तो निश्चित रूप से सफलता तो मिलेगी ही |

सुन्दरकाण्ड का नित्यप्रति पाठ करना हर प्रकार से लाभ दायक होता है, इसके अनंत लाभ है, इस पाठ को हनुमान जी के सामने तिल अथवा चमेली के तेल का दीपक जला कर करने से अधिक फल प्राप्त होता है, सुन्दरकाण्ड एक ऐसा पाठ है जो की हर प्रकार की बाधा और परेशानियों को खतम कर देने में पूर्णतः समर्थ है |आप इसे रोज नहीं कर सकते हैं तो आप शनिवार व मंगलवार को जरूर करें | एक बात अवश्य ध्यान रखें कि ब्रह्मचर्य, सदाचार व पूर्ण सामिष आहार ही इस दौरान रहना चाहिए, क्योकि हनुमान जी परम सात्विक देवता हैं |

ज्योतिष के अनुसार भी सुन्दरकाण्ड एक अचूक उपाय है, अधिकतर परेशानियों का यह रामवाण उपचार है |

श्री रामायण के सुंदरकांड की कथा सबसे अलग है। इसमें भगवान राम के गुणों की नहीं बल्कि उनके भक्त के गुणों और उसकी विजय की बात बताई गई है।

सम्पूर्ण सुन्दर कांड पाठ के श्रवण के लिए आप धर्मरस धारा (DHARMRAS DHARA) के निम्न लिखित लिंक को कॉपी पेस्ट करें और सुंदर कांड के साथ साथ श्री हनुमान चालीसा और हनुमानजी की आरती का लाभ भी लें.

https://youtu.be/xtKS_HQDwHc