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राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल का दूसरा दिन रहा शानदार। 
January 20, 2020 • Dr. Surendra Sharma

 सुबह सिनेपोलिस में फिल्म स्क्रीनिंग से शुरुआत हुई जिसमें ऑक्सीजन , लिहाफ , रोम रोम में ,आदि फिल्में दिखाईं गईं।

दोपहर में फेस्टिवल डायरेक्टर अंशु हर्ष की मशहूर फिल्म निर्माता मनीष मूंदड़ा जी से बातचीत आज का मुख्य आकर्षण रहा। बातचीत का विषय था "जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स", बातचीत के दौरान मनीष मूंदड़ा ने अपने शुरुआती दिनों से लेकर फिल्मों में आने तक के सफ़र के बारे में बात की। इसके अलावा उन्होंने बताया कि कैसे आज के दौर में इंटरनेट के माध्यम से टेलेंट को आगे लाया जा सकता है। अंशु हर्ष ने उनकी फोटोग्राफी, पेंटिंग और कविताओं पर भी बात की। बातचीत को आगे बढ़ाते हुए मनीष मूंदड़ा ने अपनी किताब 'कुछ अधूरी बातें मन की' से दो कवितायें भी दर्शकों को सुनाईं। इस दौरान सभी दर्शकों को उनकी किताब की प्रति भी दी गई। फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान उनकी बेटी दिशा मूंदड़ा की फिल्म भी दिखाई गई।
कार्यक्रम में दूसरा सेशन रहा जिसमें तनिष्ठा चटर्जी, अंशुमन झा, नमिता, दीपक महान और कोरिया से किम उपस्थित रहे। कार्यक्रम को मॉडरेट कर रहे थे अजीत रॉय। 

शुरुआत में अजीत रॉय ने फिल्मों के चेंज और कंटेंट के बारे में बात की। उन्होंने कहा 'कंटेंट विल बी स्टार ऑफ इंडियन सिनेमा'। इसके साथ उन्होंने कहा कि आज हम टेक्नॉलोजी से अच्छे से अच्छा सिनेमा बना सकते हैं। टेक्नॉलाजी की वजह से आज सिनेमा नोजवानों के हाथ में आ गया है।

तनिष्ठा चटर्जी के अनुसार अब लोग मोबाइल फोन पर फिल्म देख रहे हैं जिससे सिनेमा की पहुँच और आसान हुई है, और यह बड़े वर्ग तक पहुँच पा रहा है।अंशुमन झा ने आगे बात करते हुए कहा स्टार सिस्टम धीरे-धीरे कम हुआ है, और नए-नए लोगों ने सिनेमा में अपनी जगह बनाई है। अंशुमन के अनुसार लोग अभी भी हॉल में जाकर ही फिल्म देखना पसंद करते हैं। ख़ास तौर से बेहतरीन VFX वाली फिल्में। एक सबसे महत्त्वपूर्ण बात जो अंशुमन ने रखी कि हमारे यहाँ सिनेमा इन्फोर्मेशन एण्ड ब्रॉडकास्टिंग के अंतर्गत आता है जबकि यह आर्ट एण्ड कल्चर के अंतर्गत आना चाहिए।

किम ने कहा कि हमें सिनेमा को आपसी रिश्ते की तरह देखना होगा। एक दूसरे से सीखना होगा और काम करना है। 

दीपक महान के अनुसार OTT प्लेटफॉर्म्स की वजह से सिंगल स्क्रीन ख़त्म हो रहे हैं। क्रियेटिव लोग, कमर्शियल की वजह से बाहर हो रहे हैं। OTT की वजह से फीचर फिल्म का फ्यूचर डार्क है।नमिता के अनुसार पिछले कुछ समय में सिनेमा में नया ट्रेंड देखने को मिला है जिसकी वजह से नये लोगों की एंट्री आसान हुई है। कम समय में फिल्में तैयार हो रही हैं। जिनका बजट भी बहुत कम है, और वे शानदार फिल्में साबित हो रही हैं।

अंत में अजीत रॉय ने कहा सेंसर का काम सर्टिफिकेट देना है, सीन कट करना नहीं।