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फिल्म जगत में कोई भी एक्टर ऐसा नहींजिसने कभी हार का सामना न किया हो
February 18, 2020 • Dr. Surendra Sharma

आमतौर पर अभिनेता अपने सफर के बारे में खुल कर बात करना पसंद नहीं करते, लेकिन अर्जुन कपूर उनमें से नहीं हैं। पिछले कुछ सालों उन्होंने विभिन्न शैलियों की फिल्मों में अपना हाथ आजमाने की कोशिश की जैसे की 'गुंडे' (2014में गहरी दोस्ती-एक्शन, 'फाइंडिंग फैनी' (2014) एक व्यंग्यात्मक सड़क छाप कॉमेडी और 'पानीपत(2019) में एक मराठा यौद्धा। अर्जुन का कहना कि वह ऐसा करते रहेंगे, भले ही बॉक्स ऑफिस नंबर अच्छे न हों।

जल्द ही अभिनेत्री रकुल प्रीत सिंह के साथ एक फिल्म में नजर आने वाले अर्जुन कपूर का कहना है, 'मुझे नहीं लगता कि फिल्म जगत में कोई भी अभिनेता ऐसा होगा, जिसने कभी हार का सामना न किया हो। कई बार ऐसा होता है कि दर्शक एक अभिनेता से जो चाहते हैं, अभिनेता उन्हें वह चीज नहीं दे पाता। या कई बार चीजें उस तरह से काम नहीं करतीं, जैसी आपने कल्पना की थी।'

. अर्जुन को लगता है कि आयुष्मान खुराना इसके लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। वह बताते हैं कि फिल्म 'हवाईजादा' (2015) और 'मेरी प्यारी बिंदू' (2017) से उसे सफलता नहीं मिली, लेकिन आज वह एक सफल कलाकार है। यहां हम आपको बता दें कि आयुष्मान खुराना ने फिल्मों में अपने लिए एक अलग शैली बना ली है। वह आम आदमी से जुड़ी समस्याओं को उजागर करते हैं। इस शैली को 'उसका क्षेत्र' भी कहा जाता है। क्या अर्जुन 'अपना क्षेत्र' अभी तक तय कर पाए हैं? 'शायद अभी तक नहीं।'

वह इसे स्वीकार करते हैं लेकिन साथ ही वह यह भी कहते हैं कि 'मैं अपने करियर को लेकर खुश हूं, क्योंकि हर किसी का करियर एक ही गति से आगे नहीं बढ़ता। अगर अभिनेता टाइगर श्रॉफ के पास एक जोन है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम सभी अपने जोन को तलाशें, जैसा उन्होंने किया है। वह जो करते हैं, उन पर वह अच्छा लगता हैआयुष्मान ने कुछ सालों के बाद इसे पाया।

इसी तरह संजय लीला भंसाली से मिलने के बाद रणवीर सिंह ने अपने जोन को पाया। हमें हमेशा नतीजों की परवाह करे बगैर यात्रा का आनंद लेना चाहिए। वह कहते हैं कि 'कोई व्यक्ति जो बेहतर करना चाहता है, उसे हमेशा इस चीज को अपने दिमाग में नहीं रखना चाहिए। आपको सिर्फ आगे बढ़ने और अपने आप पर विश्वास करना होगा और यह विश्वास तब भी बना रहना चाहिए, जब अन्य लोग आप पर विश्वास नहीं कर रहे हों।'