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निजी स्कूल प्रवेशित बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं कर सकते     
September 12, 2020 • Dr. Surendra Sharma

निजी स्कूल प्रवेशित बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं कर सकते                                                                                 जयपुर। निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 16 के अनुसार कोई भी प्रायवेट स्कूल किसी भी प्रवेशित बच्चे को किसी भी परिस्थिति में शिक्षा से वंचित नही कर सकता है। 

*राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग दिल्ली का सकुर्लर दिनांक 21/04/2020 के अनुसार कोई भी स्कूल किसी भी बच्चे को फीस जमा नहीं करने के कारण पढ़ाई या शिक्षा से वंचित नही कर सकता है और फीस जमा नही करने कारण कोई भी स्कूल किसी भी बच्चे के साथ शिक्षा देने में भेदभाव नहीं कर सकता है*.

*यदि कोई भी प्रायवेट स्कूल बच्चों को किसी भी प्रकार से जानबूझकर प्रताड़ित करता है, जानबूझकर अनावश्यक मानसिक कष्ट देता है, किसी प्रकार से जानबूझकर उसकी उपेक्षा करता है तो यह किशोर न्याय(बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015(अधिनियम क्रमांक 2 सन् 2016) की धारा 75 और 86 के अंतर्गत गंभीर प्रवृति का अपराध है*.

 

*इतने नियम कानून होने के बावजूद अगर ट्यूशन फीस समस्या का समाधान नहीं होना, हजारों विद्यार्थियों का शिक्षा से वंचित होना शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा करता *आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80सी के अनुसार ट्यूशन फीस वह फीस होती है, जो हम अपने बच्चों के पढ़ाई के लिए स्कूल को देते है. जिसमें डेवलपमेंट, डोनेशन, कैपिटेशन और लेट फीस शामिल नहीं है*.

 

*शिक्षा संहिता नियम 124, अघ्याय 9-शिक्षा शुल्क पेज न. 831 के अनुसार ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क का अशय यह कि शासकीय एंव आशाकीय विद्यालयों में विभिन्न पाठ्यक्रम संबंधी एंव पाठयेतर गतिविधियों के संचालन के लिए जो शुल्क लिया जाता है उसे ट्यूशन फीस या शैक्षणिक शुल्क कहा जाता है*.

*स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर दिनांक 22/04/2016 के अनुसार स्कूल में फीस का निर्धारण स्कूल के पालकों की आमसहमति और जिला शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में निर्धारित किया जाएगा*.

 

*सीबीएसई एफिलियेशन बायलॉस 2018 के अनुसार स्कूलों में फीस पीटीए(पैरेंट्स टीचर एसोसियेशन) द्वारा स्कूलों में दी जा रही सुविधाओं के अनुसार निर्धारित होगा*.

 

*निजी विद्यालयो के द्वारा सत्र के आरंभ में ही स्कूल मैनेजमेंट कमेटी/स्कूल पालक समिति या पैरेंट्स टीचर्स एसोसियेशन और डीईओ कार्यालय के एक नामित व्यक्ति की उपस्थिति में प्रतिवर्ष शुल्क को अधिसूचित किया जाना अनिवार्य है और जिसकी जानकारी डीईओ कार्यालय को प्रतिवर्ष देना अनिवार्य है*.

 

*फीस अधिसूचित/अनुमोदित करने के उपरांत इसे जनसामान्य को अवगत कराने के लिए विद्यालय के सूचना पटल में प्रदर्शित किया जाना अनिवार्य है*.

 

*स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी सर्कुलर दिनांक 22/04/2016 के अनुसार शुल्क निर्धारण के उपरांत यदि यह पाया जाता है कि, शुल्क का निर्धारण याथोचित रूप से नही किया गया है एंव इस संबंध में पालक वर्ग संतुष्ट नही है तो जिला शिक्षा अधिकारी इसके लिए समग्र रूप से उत्तरदायी होंगे*.है*.