नशा
July 27, 2020 • Dr. Surendra Sharma

" *नशा* "

 

कोई है मगन मस्त दौलत के खातिर ,

कोई खुद में डूबा है शोहरत के खातिर ,

 

कोई प्यार की आग में जल रहा ,

कोई शत्रुता में खतम हो रहा ,

 

न संतुष्टि है न संतोष है ,

ये सब नशे का ही तो दोष है ,

 

ना चैन है ना सुकूँ है कभी ,

फंसे हैं नशे में सभी के सभी ,

 

न रिश्तों की परवाह न दुनिया का डर ,

सभी दोस्त दुश्मन से हो बेखबर ,

 

किसी को नहीं जोश में होश है ,

हर शख्स मद में मदहोश है ,

 

कोई लुट गया है,शान में ,

कोई घुट रहा है,अपमान में ,

 

अभी हों ना हों पर थे तो कभी ,

फंसे हैं नशे में सभी के सभी ,

 

ग्रसित लोग माया से सब हैं यहां ,

धरम और करम की है चर्चा कहाँ ,

 

प्रवचन में ही बस दया दान है ,

धन से ही तुलता यहां मान है ,

 

आध्यात्म पर भारी भौतिकता है ,

मिल गई खाक में सारी नैतिकता है ,

 

क्षमा बन गई डर की पर्याय है ,

बस पूजी जाती यहां आय हैं ,

 

हुई क्षीण गरिमा सभी की तभी ,

फंसे हैं नशे में सभी के सभी

                                  .                                        (हनुमानसिंह राठोड़) 

              8696536821