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मुख्यमंत्री द्वारा शहीद स्मारक को शाहिन बाग कहना, शहीदों का अपमान : डाॅ. सतीश पूनियां
February 17, 2020 • Dr. Surendra Sharma

सीएए के खिलाफ चल रहे धरनों में प्रधानमंत्री के लिए अशोभनीय
व असभ्य भाषा का इस्तेमाल निदंनीय : डाॅ. सतीश पूनियां
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जयपुर, 15 फरवरी 2020। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ. सतीश पूनियां ने आज रविवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेसवार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि जयपुर स्थित गर्वन्मेंट हाॅस्टल ‘‘शहीद स्मारक’’ पर चल रहे सीएए के खिलाफ धरना-प्रदर्शन में प्रदेश के मुख्यमंत्री का वहाँ जाकर धरने में सम्मिलित होना और वो भी उस दिन जिस दिन पुलवामा में शहीद हुए वीर जवानों की शहादत को पूरा देश श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा था तब प्रदेश के मुख्यमंत्री ‘‘शहीद स्मारक’’ को शाहिन बाग कहकर शहीदों का अपमान करने का काम कर रहे थे।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि मुख्यमंत्री बतायें कि किस मानसिकता से ‘‘शहीद स्मारक’’ को शाहिन बाग कहकर पुकार रहे थे, ये शर्मनाक बात है। मुख्यमंत्री ने वहाँ जाकर जो बातें कही है उससे आशंका है, चिंता है कि मुख्यमंत्री प्रदेश को शाहिन बाग बनाने की असफल कोशिश कर रहे है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि प्रदेश में अनेक स्थानों पर इसी तर्ज पर धरने-प्रदर्शन शुरू हुए। 21 जनवरी को टोंक में आयोजित धरने में प्रधानमंत्री मोदी जी के लिए अशोभनीय व असभ्य भाषा का इस्तेमाल किया गया जो कि निंदनीय है और जब इसकी सूचना स्थानीय प्रशासन को दी गई तो प्रशासन ने इस पर संज्ञान ना लेकर कोई कार्यवाही नहीं की। इसी तरह कोटा में आयोजित धरने में शामिल लोग वहाँ से गुजरने वाली महिलाओं और पुरूषों के साथ अभद्र हरकतें एवं असभ्य व्यवहार किया।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि जब प्रदेश के मुख्यमंत्री इस तरह की बात करेंगे तो अराजक तत्व भी इन विरोध-प्रदर्शनों में शामिल होंगे। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिग्नेश मेवाणी भी आजादी के अभिव्यक्ति के नाम पर आएगा और चन्द्रशेखर रावण भी आएगा। चन्द्रशेखर रावण कहते है कि राजस्थान में और देश में ऐसे 5 हजार शाहिन बाग बना देंगे। तो क्या राजस्थान धर्मशाला है?

डाॅ. पूनियां ने कहा कि इस तरह के धरनों में उमर खालिद भी सम्मिलित हुआ, जिसका कनैक्शन टुकड़े-टुकड़े गैंग से है। उन्होंने कहा कि इन सब बातों से साफ संकेत है कि इनके सरगना मुख्यमंत्री है और उन्हीं के इशारों पर प्रदेश में अशांति फैलाने का काम हो रहा है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि ऐसे विरोधी धरने-प्रदर्शनों को पीएफआई के जरिए फण्ड ट्राँसफर करके लोगों को पोषित किया जाता है, जिससे प्रदेश में अशांति फैल रही है। प्रदेश में चल रहे इन धरना-प्रदर्शनों में शामिल होकर मुख्यमंत्री इनकी अगुवाई कर रहे है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पास होने के बाद भी कांग्रेस सियासत करने में बाज नहीं आ रही है। अभी कांग्रेस की हैसियत क्षेत्रीय दलों से भी कमजोर हो चुकी है इसके चलते बौखलाहट साफ दिखाई दे रही है।

डाॅ. पूनियां ने बताया कि सीएए के मसले पर कांग्रेस के कई विद्वान नेताओं ने साफ तौर पर कहा कि देश की सर्वोच्च संसद द्वारा पारित कानून को जो कि केन्द्र सूची का विषय है उसको लागू करना प्रदेशों की संवैधानिक बाध्यता है उसको चुनौती नहीं दी जा सकती है। इसका समय-समय पर कांग्रेस के नेताओं ने उल्लेख किया है, जिनमें सलमान खुर्शिद, जयराम रमेश, कपिल सिब्बल और शशि थरूर सहित कई नेता है।

डाॅ. पूनियां ने बताया कि राजस्थान के उदयपुर जिले में आयोजित हुए एक कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष डाॅ. सी.पी. जोशी ने अपने सम्बोधन में स्पष्ट किया था कि इस कानून को राज्य सरकार को लागू करना ही होगा। तो वहीं डाॅ. पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि किसी प्रदेश का मुखिया अभिव्यक्ति के नाम पर अपने ही प्रदेश को एक तरह से अराजकता में धकेलने के साथ-साथ प्रदेश में अशांति पैदा करने का प्रयास किया है।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि किसी प्रदेश का मुखिया इतना अभिमानी हो जाए कि सर्वोच्च सदन से पारित संवैधानिक कानून को इस रूप में चुनौती दे कि उसमें सारी मर्यादा तोड़ दें, जिसका उदाहरण पिछले दिनों देखने को मिला था।

डाॅ. पूनियां ने कहा कि पिछले सवा साल में राजस्थान की कानून व्यवस्था पूरी तरह से चैपट हो गई है। दुष्कर्म, हत्या, डकैती और चोरी जैसी वारदातों में बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि राजधानी के साथ-साथ मुख्यमंत्री का गृह जिला जोधपुर भी सुरक्षित नहीं है और इतने अपराध हुए कि लगभग ढाई लाख मुकदमें पहली बार दर्ज हुए हैं। राजस्थान अपेक्षाकृत शांत प्रदेश माना जाता था लेकिन इस सवा साल में राजस्थान की, हिंदुस्तान में अशांत प्रदेशों में गिनती होना शुरू हो गई है।