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क्या फिर सत्ता मिलेगी - क्या कहती है अरविन्द केजरीवाल की जन्म कुंडली
January 14, 2020 • Dr. Surendra Sharma

अरविन्द केजरीवाल की जन्म तिथि का विवरण गूगल से लिया हैं इसलिए मुझे ठीक से ज्ञात नहीं की यह जन्म तारिख कितनी हद तक ठीक है लेकिन फिर भी हम इसके आधार पर कुंडली का निरिक्षण करेगे ।

अरविंद केजरीवाल की उपलब्ध जन्म कुंडली पर एक नजर डालते हैं कि इनका आने वाला समय इनके लिए कैसा रहेगा-

नाम- अरविंद केजरीवाल
जन्म तिथि- 16 अगस्त 1968
जन्म स्थान- हिसार (हरियाणा)
जन्म समय- 23:46:00 
जन्म लग्न- वृषभ, 
चन्द्र राशि- वृषभ, 
जन्म नक्षत्र- कृतिका चौथा चरण।

आज हम यह जानने की कोशिश करेंगे की क्या अरविन्द केजरीवाल की कुंडली में स्थित गृह दोबारा से उनको मुख्यमंत्री के पद तक पंहुचा सकते है? 

यह बात सिर्फ इस आधार पर खोजने की कोशिश होगी की यदि दिल्ली के 2020 में  विधान सभा चुनाव होते है तो क्या केजरीवाल के गृह उनका कितना साथ देंगे। जैसा कि हम सभी जानते हैं अरविंद केजरीवाल ने प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देकर भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू किया।
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ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि अरविन्द केजरीवाल की लग्न कुंडली में वृषभ लग्न है और लग्न के स्वामी शुक्र की स्थिति चौथे भाव अथवा माता स्थान और राजनीती में राजनीती का स्थान है।। तो यह बात तो स्पष्ट है की लग्न के स्वामी की स्थिति राजनीती के हिसाब से अत्यधिक फलदायक हैं क्योकि राजीति करियर के लिए लग्न के स्वामी का चौथे घर से सम्बन्ध अत्यधिक महत्वपूर्ण है ।

अब यदि हम उनकी चालित कुंडली पर नजर डाले तो लग्न के स्वामी की स्थिति कुंडली के पाचवे भाव में है ।
यदि हम राजनीती के नज़रिए से देखे तो पाचवा भाव जनता का भाव है और किसी राजनीतिज्ञ के लिए लग्न के स्वामी का सम्बन्ध यदि पाचवे भाव से हो जाए तो यह जनता के साथ उस व्यक्ति का एक गहरा और विशेष सम्बन्ध दर्शाता है ।

अब क्योकि राजनीती करियर में चौथे भाव का इतना महत्व है तो इसके स्वामी पर भी नजर डालना अत्यधिक आवश्यक है, क्योकि चौथे भाव के स्वामी की स्थिति के आधार पर ही हम उस भाव की शक्ति का आकलन कर सकते है, लग्न कुंडली में चौथे भाव में सिंह राशी है और इसका स्वामी सूर्य अपने ही भाव में स्थित है ।  

सूर्य की स्थिति अपने ही भाव में अरिविंद केजरीवाल के राजनीती करियर के लिए एक और वरदान है, क्योकि वैदिक ज्योतिष के अनुसार सूर्य सरकार का करक है और सरकार में बने रहने के लिए सूर्य की मज़बूत स्थिति बेहद आवश्यक है ।

सूर्य अपनी राशि में स्थित दसवे भाव को पूर्ण दृष्टि से देख रहा है, दसवा भाव कुंडली में सरकारी उच्च पद को दर्शता है ।
 ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि
पाचवे भाव के स्वामी बुध की स्थिति चौथे भाव में शुक्र के साथ, जनता के साथ एक विशेष सम्बन्ध को दर्शाता है  और भी कई तथ्य है लेकिन समय के आभाव में मै सिर्फ विशेष तथ्यों पर ही ध्यान दूंगा ।

 अब हम चलते गुरु के पास, जन्म कुंडली के चौथे भाव में स्थित गुरु सूर्य की राशी में राजनीती के लिए एक विशेष योग का निर्माण करती है, वैसे भी गुरु की स्थिति राजनीती करियर और समाज सेवा के लिए विशेष है, ऐसे लोग इमानदार और समाजसेवक होते है । ऐसे व्यक्तियों के पास यदि धन अर्जित करने के विशेष साधन भी हो तो भी वे उन साधनों का इस्तेमाल नहीं करते और एक साधरण जीवन व्यतीत करते है, हमारे देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की कुंडली में भी गुरु की स्थिती चौथे भाव में है और यही गुरु समाज सेवा और राजनीती में उठान देता है ।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि
अरविंद केजरीवाल की कुंडली में शुक्र लग्न का स्वामी है और चौथे भाव में मंगल, बुध, गुरु एवम सूर्य के साथ विराजमान है। 

ग्रहों की ये स्थिति उन्हें अति-आत्मविश्वासी एवम दूसरों पर हावी होने वाला बनाती है। उन्हें ज्यादातर झगड़ालू दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। 


ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि
अरविंद केजरीवाल की कुंडली के लग्न में (चौथे भाव में) गुरु, बुध और शुक्र जैसे 3 शुभ ग्रहों के योग के कारण उन्होंने अपनी राजनीति को शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली-पानी जैसे मूलभूत सुविधाओं को कम दामों में देने की लोकलुभावन नीति अपनायी। किन्तु हानि के 12वें घर में पड़े शनि के अशुभ योग के कारण उनकी पार्टी के कई प्रभावशाली नेता बेहद विवादास्पद झगड़ों के बाद उनको छोड़ कर जाते रहे। 

अरविन्द केजरीवाल की कुंडली में वर्तमान में गुरु में की महादशा में राहु की अंतर्दशा चल रही है। 

चन्द्रमा नवम भाव में नवमेश मंगल के साथ परिवर्तन योग में है और साथ ही उस पर पंचमेश गुरु की दृष्टि है, जिसके कारण यह दो बड़े योगों का प्रभाव लिए हुए है।

 इस दोहरे शुभ योग के प्रभाव से केजरीवाल अपनी उदार छवि के बलबूते बीजेपी और कांग्रेस की दोहरी चुनौती को मात देकर फिर एक बार दिल्ली प्रदेश के मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
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वृषभ लग्न वाले लोग मेहनती, कर्मशील, कर्मठ व सबका साथ देने वाले होते हैं। 

कुंडली में तीसरे घर के अन्दर मंगल एक योगकारी कर्क माना जाता है। कार्य के घर पर मंगल की दृष्टि पड़ रही है और यह अरविन्द केजरीवाल के लिए अच्छा योग है। कार्य के घर पर अगर मंगल की दृष्टि होती है तो पैसा, मान-सम्मान में जातक को फायदा प्राप्त होता है।

वृषभ लग्न में ब्रहस्पति के परिणाम की बात करें तो जातक को सफलता तो प्राप्त होती है किन्तु समय-समय पर देवगुरु वृहस्पति जातक को परेशान करता रहता है।
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मंगल का नीच भंग अरविंद को राजनीति में प्रभावशाली बनाएगा।

अरविंद केजरीवाल के बयान ईमानदारी से जुड़े होते हैं, अत: दूसरे उसे नकार देते हैं। लेकिन जनता भाव का स्वामी शुक्र वाणी भाव में है। जो गुरु के साथ-साथ पराक्रमेश बुध के साथ है इसी वजह से अरविंद खुलकर चैलेंज भी करते हैं।

केतु राहु के मध्य सारे ग्रह होने पर अरविंद को पूरी तरह आम जनता का साथ नहीं मिल पा रहा है।

अरविंद के जन्म के समय शनि नीच का है, लेकिन वक्री होने से शनि का फल उत्तम रहेगा। 

लेकिन उनकी उपलब्ध कुंडली में बना कालसर्प योग बाधा देता है। ऐसे लोग अपने जीवन को अपने कार्यों से विशेष बना लेते हैं।

अरविन्द केजरीवाल जी की कुंडली में वृषभ लग्न होने के कारण इन्हें मेहनत का फल तो प्राप्त हो रहा है लेकिन महादशा का साथ न होने के कारण तकलीफों का सामना भी करना पड़ रहा है। अभी इनकी महादशा देवगुरु वृहस्पति की व अंतरदशा राहु व प्रत्यांतर में शुक्र चल रहे हैं। सूर्य और शनि का भी मेल नहीं बनता है इस कारण से भी कार्य के क्षेत्र में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

राजधानी दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री जी की कुंडली में एक बड़ा दोष, ‘कालसर्प दोष’ का होना है। यह दोष समय-समय पर अपना प्रभाव दिखाता है। इस दोष के कारण ऐसा नहीं है कि व्यक्ति को सफलता प्राप्त नहीं होती है किन्तु मान-सम्मान, जन सहयोग सबकुछ मिलने के बाद भी आदमी कब सबकी नज़रों में गिर जाये, इसका पता नहीं होता है।

मान-सम्मान की दृष्टि से सूर्य-बुध दोनों ही ग्रह अच्छी स्थिति में हैं, संघर्ष के बावजूद इनको यह ग्रह मुश्किलों से बचाने का कार्य कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे।

ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार
नवम भाव (भाग्य) का स्वामी गुरु द्वितीय भाव (वाणी) में चतुर्थेश शुक्र व तृतीयेश बुध के साथ है और इस कारण से अरविंद की वाणी से निकला एक-एक शब्द तीर के समान विरोधी पार्टी को लगता है।
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ज्योतिषाचार्य पंडित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि
वर्तमान में भाजपा की मिथुन लग्न की कुंडली में चन्द्रमा में राहु की भ्रमित करने वाली विंशोत्तरी दशा पिछले वर्ष सितम्बर के मध्य से चल रही है। चंद्रमा में राहु की कमजोर दशा के चलते भाजपा ने हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में उम्मीद से कम प्रदर्शन किया और झारखण्ड में तो उसे बुरी हार का सामना करना पड़ा। 

भाजपा की कुंडली में राहु के गुरु के साथ बन रहे ‘चांडाल योग’ के चलते उसे सांप्रदायिक विवादों जैसे नागरिकता कानून में बदलाव के बाद प्रतिरोध झेलना पड़ रहा है। 
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दूसरी तरफ दिल्ली प्रदेश में 1998 से 2013 तक स्वर्गीय शीला दीक्षित के नेतृत्व में सत्ता में रही कांग्रेस अब राज्य में फिर से अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटी है। 

मीन लग्न की कांग्रेस पार्टी की कुंडली में गुरु में सूर्य की दशा चल रही है। 
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किन्तु दिल्ली प्रदेश में आम आदमी पार्टी की स्थिति ज्योतिषीय दृष्टिकोण से अधिक मजबूत है क्यूंकि इनकी मकर लग्न की कुंडली में दशम में बैठे शुक्र की महादशा में लाभ भाव में बैठे राहु का अंतर है जो कि अप्रत्याशित सफलता दिला सकता है।

उज्जैन के ज्योतिर्विद पंडित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार अरविन्द केजरीवाल बस विरोधियों से खुद का बचाव करते रहें और अपने भी समय-समय पर इनको धोखा देने का कार्य कर सकते हैं। शत्रु घर का स्वामी शुक्र होता है और अभी इनकी कुंडली में शुक्र, सूर्य के साथ आ गया है और इस कारण से शुक्र अस्त हो चुका है। अरविन्द जी को कोई भी ऐसा कार्य नहीं  करना चाहिए, जिससे विरोधियों को हावी होने का मौका प्राप्त हो।

मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को इसके बधाई देता है और उम्मीद करता है कि आगामी समय इनके लिए अच्छा रहेगा।वह ही दिल्ली के मुख्यमंत्री होगे।

यदि हम केजरीवाल की मौजूदा दशाओं की बात करे तो उनकी गुरु की महादशा (17 अगस्त 2020 तक) में तथा राहु की अंतर दशा ( 17 अगस्त 2020 तक  ) तथा शुक्र का प्रत्यन्तर (02 मार्च 2020 तक) चल रही है ।

दोनों ही गृह उनको समाज सेवा तथा राजनीती की तरफ धकेल रहे है, यदि दिल्ली में 2020 में विधान सभा चुनाव होते है, तो उनकी कुंडली के अनुसार 90 % से अधिक कहा जा सकता है की वे दोबारा से मुख्यमंत्री के पद तक पहुच जायेंगे ।

अन्य पार्टियों को जितने के लिए उनके सामने ज्योतिष के नज़रिए से एक मज़बूत नेता खड़ा करना होगा अन्यथा उनको मुह की खानी पड़ेगी ।