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कुडंली के भावों से जुड़ा है व्यक्ति का यश-वैभव
December 24, 2019 • Dr. Surendra Sharma

 राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन में देशभर से आए ज्योतिषियों ने ग्रह दशाओं पर किया मंथन

जयपुर। व्यक्ति के स्वास्थ्य, महाविद्यालय में धर्म व ज्योतिष संयोजक डॉ. शालिनी सक्सेना ने समृद्धि, सफलता और ऐसे ही विभाग की ओर से अयोजित दो बताया कि सम्मेलन के पहले दिन तमाम विषयों पर ज्योतिष विज्ञान दिवसीय राष्ट्रीय ज्योतिष सम्मेलन प्रमुख आकर्षण आमजन को का खासा प्रभाव रहता है। चाहे घर का। सम्मेलन के मुख्य अतिथि निशुल्क ज्योतिषीय परामर्श रहा। का वास्तु दोष हो या काफी प्रयासों कषि मंत्री लालचंद कटारिया थे इस दौरान जन्मपत्री. टैरोकार्ड. के बाद भी रोजगार न मिल रहा हो वहीं विशिष्ट अतिथि प्रो. विनोद हस्त रेखा, कुंडली आदि से लोगों या फिर अक्सर बीमारी घेरे रहती शास्त्री थे और अध्यक्षता कॉलेज की शंकाओं का समाधान बताया है। इन सब मसलों का हल कुंडली शिक्षा आयुक्त प्रदीप कुमार बोरड़ गया। आयोजन समिति के डॉ. और ग्रहों में छिपा हुआ है। अगर ने की। कार्यक्रम में संस्कृत अनिल स्वामी ने बताया कि पहले शयन कक्ष में शौचालय बना हुआ महाविद्यालय के प्राचार्य व दिन विभिन्न विषयों पर शोध पत्र हो तो घर में बीमारियों का डेरा आयोजक डॉ. भास्कर शर्मा भी पढ़े गए।बना रहेगा। इसी तरह कुंडली के श्रोत्रिय कहा कि धर्मानुकूल चंद्रमा और शुक्र देता है चतुर्थ, सप्तम और दशम् भाव से आचरण से जीवन में प्रसन्नता एवं यश और सम्मान : सम्मेलन में व्यक्ति के यश व मान-सम्मान की आनंद बढ़ता है, फिर उन्हें ज्योतिषियों ने बताया कि कुंडली दिशा तय होती है। यही नहीं, ज्योतिषीय परामर्श की के चौथे, सातवें और दसवें भाव आभूषण पहनने से भी शरीर के आवश्यकता ही नहीं पड़ती। धर्म के साथ-साथ 12वें भाव से स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर के आचरण में कमी के चलते ही व्यक्ति के मान-सम्मान की स्थिति पड़ता है।ज्योतिष, ग्रह नक्षत्र और जीवन में अशांति आती है। भी देखी जाती है। मूल रूप से कुंडली की दशाओं से मानव शरीर कार्यक्रम के आयोजन सचिव डॉ. चंद्रमा और शुक्र यश प्रदान करने व प्रकृति पर होने वाले प्रभावों की रवि शर्मा ने बताया कि सम्मेलन वाले ग्रह हैं। हस्तरेखा विज्ञान में ऐसी ही गणनाओं पर देशभर से में केरल, पंजाब, हिमाचल, जम्मू, सूर्य को यश का ग्रह माना जाता आए ज्योतिषियों ने सोमवार से गोवाहटी, उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश, है। वहीं शनि, राहु और खराब यहां मंथन किया। मौका था दिल्ली आदि राज्यों से 150 से चंद्रमा यश में बाधा पहुंचाने वाले राजकीय महाराज आचार्य संस्कृत ज्यादा ज्योतिषी भाग ले रहे हैं। ग्रह हैं।