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कोरोना वायरस का असर चीन के शेयर बाजार में 13 साल की सबसे बड़ी गिरावट, निवेशकों को 32 लाख करोड रुपए का नुकसान
February 4, 2020 • Dr. Surendra Sharma

एजेंसी

शंघाई। कोरोनावायरस के असर चिंताओं से चीन के शेयर बाजार सोमवार को भारी बिकवाली हुई। शेनझेन कंपोजिट इंडेक्स में 8.5% गिरावट आ यह 13 साल में सबसे ज्यादा है। शंघाई कम्पोजिट इंडेक्स 7.7% गिरकर एक के निचले स्तर पर पहुंच गया। यह साल की सबसे बड़ी गिरावट भी है। इंडेक्स की गिरावट से निवेशकों को 445 अरब डॉलर (32 लाख करोड़ रुपए) का नुकसान हो गया। चीन के शेयर बाजार रेग्युलेटर ने कहा है कि बाजार की गिरावट से प्रभावित कंपनियों को 2019 सालाना और 2020 के तिमाही नतीजे घोषित करने के तय समय में छूट दी जाएगी

हॉन्गकॉन्ग में चीन के साथ सीमा बंद करने की मांगः हॉन्गकॉन्ग के अस्पताल के सैकड़ों कर्मचारी सोमवार को हड़ताल पर चले गए। उनकी मांग है कि कोरोनावायरस से बढ़ते खतरे को देखते हुए चीन के साथ हॉन्गकॉन्ग की सीमा को बंद किया जाए। हॉन्गकॉन्ग ने चीन जाने वाली रेल और फेरी (नौका) सेवा पहले ही बंद कर दी है। लेकिन, कर्मचारी पूरी तरह से सीमा बंद करने की मांग कर रहे हैं।

केंद्रीय बैंक ने सिस्टम में 12 लाख करोड़ रुपए बढ़ाए, फिर भी करंसी में गिरावट: चीन की करंसी में भी सोमवार को तेज गिरावट आई। वहां की मुद्रा युआन 1.5त्र गिरकर 7 युआन प्रति डॉलर के नीचे आ गई। चीन के केंद्रीय बैंक ने सिस्टम में नकदी बढ़ाकर गिरावट रोकने की कोशिश की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। सेंट्रल बैंक ने रविवार को ही कह दिया था कि शॉर्ट टर्म बॉन्ड की खरीदारी के जरिए बैंकिंग सिस्टम में 173 अरब डॉलर (12.36 लाख करोड़ रुपए) की रकम डाली जाएगी, ताकि बैंकों की कर्ज क्षमता बढ़ सके और करंसी बाजार स्थिर रहे। बैंकों ने ब्याज दरें घटाई ताकि प्रभावित लोगों को आर्थिक दिक्कतें ना हों: चीन में नए साल की छुट्टियों के बाद शेयर बाजार में कारोबार का सोमवार को पहला दिन था। हालांकि, शुक्रवार को बाजार खुलना था, लेकिन सरकार ने छुट्टी बढ़ा दी थी। चीन में कोरोनावायरस के संक्रमण के 17 हजार से ज्यादा मामले सामने आ चके हैं। केंद्रीय और स्थानीय सरकारें पीड़ितों के इलाज और मेडिकल उपकरणों पर खर्च के लिए अब तक 12.6 अरब डॉलर (90 हजार करोड़ रुपए) की रकम जारी कर चुकी हैं। इकोनॉमी पर कोरोनावायरस का असर कम करने के लिए सरकार कई कदम उठा रही है। ज्यादा प्रभावित इलाकों में प्रमुख बैंकों ने कर्ज की ब्याज दरें घटा दी हैं, ताकि लोगों को आर्थिक रूप से दिक्कतें नहीं हो।