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कोरोना के अंधकार पर आलोकित हो संकल्प का प्रकाश
April 5, 2020 • Dr. Surendra Sharma


कोरोना के अंधकार पर आलौकित हो संकल्प का प्रकाश

प्रोफे. डां. तेजसिंह किराड़
(वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीति विश्लेषक)

" अदम्य साहस,दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्म संकल्प से आज भारत ने दुनिया को दिखा दिया कि भारतीय एकजूट होकर बड़ी से बड़ी युध्दकीय लड़ाई और खतरनाक महामारी से कैसे लड़कर विजय प्राप्त कर सकता है।  कोरोना संक्रमण के फैलाव को रोकने में भारत ने  जिस तत्परता से वायरस को फैलने से  रोका है यह एक बहुत बड़ी  दूरदृष्टा भारत के नेतृत्व की ही देन कहें कि  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के एक विनम्र अनुरोध और निवेदन पर हर एक डाक्टर्स,समाज सेवक, पुलिस,प्रशासन,जनता और राज्यों की   रणनीति का ही परिणाम है कि  " जनता कर्फ्यू की अपार सफलता और देश में लांकडाउन ने शत प्रतिशत सफलता के रूप में  विजय प्राप्त की है । एक सौ तीस करोड़ भारतीयों  से पुन: आगामी ५ अप्रैल,रविवार  को ९ बजे,९ मिनट के लिये विद्युत प्रवाह बंद कर  अपने ही घरों के दरवाजों,खिड़कियों और छत पर  मोमबत्ती,दीपक, टार्च या मोबाईल बैट्री के प्रकाश से कोरोना के अंधकार, महामारी वायरस का सर्वनाश और भयावह डर को पूरी खत्म करने में राष्ट्र जनता से सहयोग की अपील की गयी है। सभी सनातन शास्त्रों में  कहा गया है कि--"  हर व्यक्ति को अपने जीवन में व्याप्त घोर अज्ञान के अंधकार से प्रकाश में आलौकित होने का सुअवसर  प्राप्त हो।" ठीक ऐसे ही कोरोना महामारी से लड़ाई के मध्य जो दुनिया के आकाश में एक भयजदा खौफनाक अंधकार छाया हुआ है उसे दीप के प्रकाश से भेदकर  सबके जीवन में एक हर्षमय  प्रकाश का संचरण हर घर के हर एक सदस्य के ह्रदय में आलौकित करना है । जिससे इस कोरोना महामारी से लड़नें वालों की हर तरह से विजयश्री सुनिश्चित हो सकें। इस लड़ाई में भारत के हर प्रांत वासी,हर एकभाषायी , ने एकजूट होकर अपनी अदम्यता का परिचय दिया है । अपवाद के रूप में  कुछ लापरवाहियों ( मरकज) के कारण परिस्थितियां एकाएक भयावह हुई है। कोरोना संक्रमणितों के आंकड़ों के ग्राफ ने सबको हैरान कर दिया है। परन्तु तसल्ली के लिये एक यही पहलू सकारात्मक है कि कोरोना से मौत का ग्राफ ज्यादा प्रभावित नहीं हुआ है।वरना, भारत के सेवावीरों पर सबसे बड़ा पक्षाघात होना अवश्यंभावी था। चारों ओर से नियंत्रण की लक्ष्मण रेखा ने मरकज के मनसूबों को नेस्नाबूद कर दिया है। यह भी एक जीत ही है कि इतनी भयानक स्थिति में भी भारत की जनता ने,सेवावीरों ने अपना साहस नहीं खोया और पूरी ताकत से मरकजियों के बूरें इरादों को भी पस्त कर दिया है। हालात तेजी से बदल रहें है और आशा से ज्यादा बेहत्तर परिणाम के आंकड़ें गवाह है कि  हमारी एकजूटता ही हमारी सबकी ताकत है । यही नहीं विपरीत व विकट  परिस्थितयों में भी राष्ट्रहित के लिये देशवासियों की धैर्य , संयम  और आत्म संकल्प ही सबसे बड़ा हथियार है जिसके बलपर भारत को  दुनिया में एक विशिष्ट सम्मान से भी देखा जाने लगा है। और दुनिया भारत के हर एक साहसिक और संस्कृतियुक्त व्यावहारिक प्रयासों को भी सराहना कर रही है। चिकित्सकीय संसाधनों के अभावों के बावजूद भारत ने  धैर्यपूर्वक कोरोना महामारी के  विरूध्द लड़ाई को जीता है। विशुध्द रूप में यह जीत हमारें परम्परागत  सामाजिक संस्कारों  के साथ-साथ धार्मिक और आध्यात्मिक  जीवन उत्प्रेरिक मूल्यों  की भी है। जो हमें मानव से महामानव  बनने और इंसान से इंसानियत की भी सीख देते है।भारत का एक महान गौरवमयी इतिहास भी रहा है कि चाहे युध्द की विभीषिका हो या अघोषित युध्द जैसी कोई महामारी का प्रकोप हो,भारत ने अपने सीमित संसाधनों से ही एकजूट होकर हर काल और परिस्थितयों में सदैव विजयश्री ही हासील की है। वसुदैवकुटुम्बकम की भावना ने हर भारतीय को एक संस्कारित जीत का गुण जन्म से ही प्रदान किया हुआ है। इतिहास गवाह है कि  दृढ़ संकल्पित विचारों से भारत कभी नहीं हारा है। चाहें महाराज पुरू और सिकन्दर महान का ही युध्द क्यों ना हो। भारत में आकर हार तो सिकन्दर की ही हुई है। ऐसे ही भारत भी कोरोना पर पूर्णरूपेन विजय  की देहलीज पर खड़ा है। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान  हताश और निराश होकर भारत के इस कारनामें की सफलता को पचा नहीं पा रहा है। जबकि कोरोना के विरूध्द भारत की रणनीति, कुटनीति और सबके प्रति सहिष्णुता की भावना से प्रेरित होकर विश्वमंचस्तर पर जी-२० और अनेकानेक देशों ने भारतीय एकजूटता  की उन्मुक्त कंठ से भूरि-भूरि प्रसंशा भी की है। विपदा की इस घड़ी में भारत के एक कुशल नेतृत्व ने दुनिया को भी हतप्रद कर दिया है कि धैर्य, संयम, प्रेमभाव, समभाव और आत्म संकल्प के बलपर हर मुसीबतों से कैसे निपटा जा सकता है। दुनिया की महाशक्ति वालें देशों का मानवबल बड़ी संख्या में मौत के गाल में समा चुका है। और वहीं  बड़ी लड़ाई  इन देशों में अभी भी रात-दिन जारी है। अमेरिका,इटली,  स्पेन, फ्रांस, ईरान, चीन, स्वीडन, ब्रिटेन, उत्तरी कोरिया, ही नहीं दुनिया के २००से अधिक देशों में फैल चुकें कोरोना वायरस के संक्रमण से ये सभी देश संघर्षरत लड़ाई लड़ रहें हैं।अपवाद स्वरूप पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो अपनी कायनात की जीवन सुरक्षा के लिये लड़ाई लड़ने का औपचारिक दिखावा भर कर रहा है। कोई देश अपनी अवाम के लिये ऐसा नहीं कर सकता जो पाकिस्तान अपने हुक्मरानों के दिखावें और  बड़बोलेपन के  कारण आज वह अपनी अवाम के ही साथ भी धोंखा कर रहा है। कोरोना महामारी के चलते हाल ही में लाहौर में एक अन्तर्राष्ट्रीय जमाती जलसे में  बड़ी संख्या में दुनिया के नुमाइंदों में कोरोना के संक्रमण वायरस पाये गये है। इसे लेकर पूरी दुनिया फिर से दहल गयी है। कई देशों के जमाती जलसें के  प्रतिनिधियों ने उनके ही देशों में अब जलसें से जाकर खतरनाक माहौल पैदा कर दिया है। पाक की इस गैर जिम्मेदाराना हरकतों के कारण दुनिया के कई देश बड़े सदमें है।आज कोरोना  के कारण इंसानियत तबाह हो चुकी है। और मानव सभ्यता और संस्कृति मौत के द्वार पर आकर खड़ी हो गयी है। ऐसे में एकमेव भारत ने अपनी आध्यात्मिक शक्ति और मानवीय सहिष्णुता के दमपर कोरोना संक्रमण से हुई मौत दर पर अप्रत्याशित नियंत्रण प्राप्त कर रखा है । दुनिया यह देखकर और सोचकर हैरान है कि भारत जैसे विकासशील देश ने कैसे जनता कर्फ्यू, पूर्ण लाँकडाउन,राज्यों और प्रशासन के बीच बेहत्तर समन्वयन से गांवों -शहरों  को एक नियंत्रित लक्ष्मणरेखा से बांधें रखा गया है।
आईयें ! हमसब ना केवल अपने भारत से कोरोना महामारी के अंधकार को दीप प्रकाश से दूर करें वरन वसुदेवकुटुम्बकम की पवित्र भावन के साथ दुनिया के हर एक राष्ट्र  के हर एक घर से ही कोरोना खौफ के अंधकार को खत्म कर सबके जीवन को पुन: प्रकाशित करने, दृढ़मय रूप से कृतसंकल्पित होकर उन सबके भविष्य को आलौकित कर सकें जो कोरोना संक्रमण की लड़ाई में हर एक कंधे से कंधा मिलाकर निस्वार्थ भाव से देश और दुनिया के लिये लड़ रहा है।  यही सच्चें मन से ली गयी शपथ भी है और व्यवहारगत भारत की सनातन एक संस्कृति भी है।
 फैले संकल्प का प्रकाश
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कोरोना की सर्वत्र दहशत बैचेनी में
मन के अंधकार को करने दूर,
दृढ़ संकल्पित सेवा को बांटे आपस में 
एकदीप जलानें का,सब करें पवित्र संकल्प।
आलौकित हो लौ से सबके दृढ़ प्रकल्प। 
उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम तक
चारों तरफ है अंधकार  दूर-दूर तक।
आत्मविश्वास की, इस अदृश्य जंग में
हर एक जुटा है, लेकर संकल्प मन में
मन में है खौफ जो,अंतहीन क्षितिज तक 
लड़ रहा है वही,जो थका नहीं है अबतक।
एक दीप हम जलाये हर्षित हो मन से 
हट जाये ये अंधेरा,भाग जाये डर मन से।
सेवा का मूल्य ना आंकों, ये वक्त है बड़ा कठिन 
गुजर ही जायेगा ये कारवां,मौत का जो बना सफर।
गलतियों से थमा नहीं अभी,
कम्बख्त ये मौत का सिलसिला।
बेगुनाहों की मौत का, कब रुकेगा अफसला।
निकलें ना कोई घरों से ये सब्र का है  कारवां।
रूका रहा गर घरों में ही ये सैलाब , 
तो फैलेंगा एकदिन जीत का प्रकाश।
मन को ना अधीर करो,मंजिल है आसपास।
सब्र से लो काम सभी,टूट ना जायें कोई आस।
आज सब एक दीप जरूर जलाओं, 
 मन में लेकर संकल्प का विश्वास।

प्रोफे. डां तेजसिंह किराड़ "तेज"
(वरिष्ठ पत्रकार व राजनीति विश्लेषक)
   नागपुर -09823341909