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किशोरियों को दे भावनात्मक सहयोग -स्वरूप संपत 
May 30, 2020 • Dr. Surendra Sharma

माहवारी स्वच्छता पर सेव द चिल्ड्रन की वेबीनार    किशोरियों को दे भावनात्मक सहयोग -स्वरूप संपत                 जयपुर। महिलाओं और किशोरियों में महावारी एक सामान्य प्रक्रिया है और इसे झिझक और शर्म के रूप में नहीं देखना चाहिए । महावारी एक जीवन उत्सव है और इसे खुशी से स्वीकार करना चाहिए। परिवार के सदस्य महिलाओं और किशोरियों को माहवारी के दौरान भावनात्मक सहयोग प्रदान करें। प्रसिद्ध अभिनेत्री पूर्व मिस इंडिया शिक्षाविद डॉ स्वरूप संपत रावल ने सेव द चिल्ड्रन द्वारा माहवारी स्वच्छता दिवस पर आयोजित वेबीनार में राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश राज्य  के किशोर किशोरियों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि स्कूल शिक्षा के साथ-साथ जीवन कौशल शिक्षा बेहद आवश्यक है यह न केवल बच्चों को सशक्त बनाती है बल्कि उन्हें आत्मविश्वास से जीना और विकट परिस्थितियों में बेहतर विकल्प चुनने की क्षमता प्रदान करती है।                                                       स्वरूप संपत ने परिवार और समाज को माहवारी के प्रति सोच बदलने पर जोर देते हुए कहा कि बेटियों के मानसिक विकास स्वास्थ्य के लिए उन्हें स्नेह पूर्ण वातावरण प्रदान करें ।उन्होंने स्कूलों में शौचालय और पानी के प्रबंधन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि महावारी के दौरान किशोरियों का स्कूल नहीं जाने का कारण वहां पर शौचालय का ना होना है । राजस्थान राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष संगीता बेनीवाल ने कहा कि कोविड महामारी के कारण किशोरियों की जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है। आर्थिक तंगी का बहाना बनाकर पुरुष वर्ग सैनिटरी नैपकिन खरीदने से बच रहे हैं। और महिलाओं और किशोरियों को योनि में प्रजनन तंत्र संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।                                                                 सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनवाड़ी के द्वारा नैपकिन वितरण की व्यवस्था को सुचारू कर रही है। बेनीवाल ने आगे कहा कि पुरुषों को माहवारी के प्रति अपनी धारणा बदलने की जरूरत है। आज किशोर किशोरिया विभिन्न मंचों पर महावारी के संबंध में खुलकर चर्चा कर रहे हैं। यह बेहतर भविष्य और बदलाव का संकेत है माहवारी छुपाने डरने की बात नहीं है। हमें माहवारी की जानकारी रोचक तरीकों जैसे नाटक और कॉमिक्स के जरिए बच्चों को देनी होगी। आयोग द्वारा कोविड के दौरान सेनेटरी पैड वितरण के निर्देश विभागों को जारी कर दिए गए हैं ।जोला गांव टोंक की ज्योति गौतम ने कहा कि सरकार द्वारा सरकारी स्कूल की लड़कियों को स्कूल में और ड्रॉपआउट लड़कियों को आंगनवाड़ी पर मिलते हैं परंतु ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइवेट स्कूल और कॉलेज में भी लड़कियों को निशुल्क सेनेटरी पैड मिलने चाहिए।                                                                        जीवन कौशल की प्रशिक्षण प्राप्त ज्योति ने बताया कि वह अपने गांव और आसपास के स्कूलों में जाकर लड़कियों को माहवारी संबंधी जानकारी दे रही है। नासिक महाराष्ट्र की पूनम ने बताया कि वह स्कूल की स्वास्थ्य मंत्री है और स्कूल में शौचालय की व्यवस्था ठीक नहीं होने पर शाला प्रबंधन समिति के सहयोग  से ठीक करवाया । शोचालय की दीवारों पर सेनेटरी पेड के उपयोग और उनके निस्तारण की जानकारी चित्रित करवाई मुंबई की हाजी अली इलाके की लतीफा ने बताया कि कॉविड के कारण उनके इलाके में सार्वजनिक शौचालय सीमित समय के लिए ही खोले जाते थे ,महावारी के दौरान महिलाओं को दिक्कत आ रही थी इसके लिए पुलिस और प्रशासन से बात की और उन्हें खुलवाया गया।                                   ओसिया जोधपुर के घनश्याम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि किशोर समूहो से जुड़ने के बाद मैंने माहवारी को ठीक से समझा और इसके प्रति पुरुषों की सोच बदलने का काम कर रहा हूं। माहवारी के दौरान लड़कियों में होने वाली खून की कमी को दूर करने के लिए उन्हें नियमित आयरन टेबलेट लेने हेतु प्रेरित करता हूं सेव द चिल्ड्रन की सीईओ विदिशा पिल्लई ने कहा कि महावारी अब शर्म या हिचक की  बात नहीं है । इस सब विषय पर अब चुप्पी तोड़ने का समय आ गया है। सेव द चिल्ड्रन कोविड महामारी के दौरान किशोरियों को सेनेटरी पैड वितरण का काम कर रहा है। मध्यप्रदेश में किशोरी समूह के साथ काम कर रही स्नेह लता ने कहा कि शहरी क्षेत्र में भी किशोरियों को महावारी के संबंध में पूरी जानकारी नहीं है।                                                 सेव द चिल्ड्रन के डिप्टी डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा कि सामाजिक बुराइयों की बेड़ियों में के टूटे की शुरुआत हो चुकी है माहवारी पर अब खुलकर बात हो रही है। और यह महिला और किशोरी स्वास्थ्य के लिए एक सुखद संकेत है अच्छी बात है कि ईश्वर या अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रही हैं और सेनेटरी पेड की मांग कर रही हैं।  समाज में व्याप्त धारणाएं बदल रही हैं । कम्युनिकेशन मैनेजर डॉ हेमंत आचार्य ने बताया कि माहवारी स्वच्छता दिवस पर आयोजित वेबीनार महावारी रुकती नहीं महामारी में 300 किशोर किशोरियों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संगठन के प्रतिनिधियों ,महिला एवं बाल विकास स्वास्थ्य विभाग एवं राज्य बाल संरक्षण आयोग के सदस्यों ने भाग लिया।