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जानिए शनि देव के राशि परिवर्तन एवम उपायों के बारे में -पंडित दयानंद शास्त्री
January 18, 2020 • Dr. Surendra Sharma


 24 जनवरी 2020 को सायंकाल शनि अपना राशि परिवर्तन कर रहे है। अब शनिदेव धनु से मकर राशि मे प्रवेश कर रहे  है ।
शनि एक राशि मे ढाई साल रहते है और जब विपरीत फल देते है तो लोग त्राहिमाम करने लगते है।ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की शनि गोचर में चंद्र राशि से द्वादश,उसी राशि में, द्वितीय ,चतुर्थ और अष्टम भाव मे अच्छे फल नही देते है।

लगातार तीन भावो में विपरीत फल देने के कारण साढ़े साती और एक राशि होने के कारण ढैया कहा जाता है।ऐसी मान्यता बन गयी है कि शनि की साढ़ेसाती और ढैया शुभ नही होते है।

 पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार ऐसा नही है कि शनिदेव हमेशा अशुभ फल ही करते है। जन्मांग चक्र में शनि की अच्छी स्थिति और अष्टक वर्ग में शुभ विंदु ज्यादा होने से इसका प्रभाव ज्यादा नही होता है।
(इसके लिए अपनी जन्म कुंडली किसी योग्य एवम अनुभवी ज्योतिषी को दिखाएं)।

शनि के राशि परिवर्तन के बाद धनु राशि वालो का अंतिम चरण की,मकर राशि वालो की मध्य चरण की,और कुम्भ राशि वालो की साढ़े साती प्रथम चरण की शुरू हो जाएगी।तुला और मिथुन राशि वालो की ढैया शुरू हो जाएगी।

शनि के इस राशि परिवर्तन से भयभीत होने  की बात नही है। जिनकी कुंडली मे शनि देव शुभ होते है वह जातक को बहुत ऊंचाइयों पर पहुँचा देते है ।
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अगर साढ़ेसाती और ढैय्या आपको अशुभ प्रभाव दे रही है तो ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री द्वारा सुझाए गए कुछ उपाय आप नियमित कर परेशानियों से बच सकते है।
जैसे--

शनि चालीसा' का पाठ, शनि मंत्रों का जाप एवं 'हनुमान चालीसा' का पाठ करें।
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शनिवार को पीपल के पेड़ पर सात प्रकार का अनाज चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएँ।
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शनिवार को तिल से बने पकवान, उड़द की दाल से बने पकवान गरीबों को दान करें।उड़द दाल की खिचड़ी दरिद्र नारायण को दान करें।
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शनि देव की प्रसन्नता हेतु इस दिन काली चींटियों को गु़ड़ एवं आटा देना चाहिए।
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शनिवार को सूर्यास्त के बाद हनुमानजी का पूजन करें। पूजन में सिन्दूर, काली तिल्ली का तेल, इस तेल का दीपक एवं नीले रंग के फूल का प्रयोग करें।
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किसी भी शनिवार को निकट के भैरव मन्दिर जाकर भैरवजी की उपासना करें और शाम के समय काले तिल के तेल का दीपक लगाकर शनि दोष से मुक्ति के लिए।
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एक कांसे की कटोरी में तिल का तेल भर कर उसमें अपना मुख देख कर और काले कपड़े में काले उड़द, सवा किलो अनाज, दो लड्डू, फल, काला कोयला और लोहे की कील रख कर शनि का दान लेने वाले को दान कर दें।
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अगर आपको साढ़े साती,ढैय्या के साथ शनि की दशा भी चल रहा हो तो ये उपाय करिये काला सुरमा एक शीशी में लेकर अपने ऊपर से नौ बार सिर से पैर तक किसी से उतरवा कर सुनसान जमीन में गाड़ देवें।
फिर देखे कैसे उड़न छू होते है आपके कष्ट।
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जानिए वैदिक मन्त्रो एवम उपायों द्वारा कैसे करें शनि महाराज को प्रसन्न --
इन मंत्रो मे से किसी भी एक मन्त्र का जाप अपने आवश्यकता अनुसार  शनिवार  से शुरू कर प्रतिदिन कर के देखिये आप चमत्कारिक रूप से इनके लाभ को स्वयं महसूस करेंगे।
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(1)प्रतिदिन श्रध्दानुसार 'शनि गायत्री' का जाप करने से घर में सदैव मंगलमय वातावरण बना रहता है।शनि मंत्र व स्तोत्र सर्वबाधा निवारक है।वैदिक गायत्री मंत्र-
"ॐ भगभवाय विद्महे मृत्युरुपाय धीमहि, तन्नो शनि: प्रचोदयात्।"
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(2)वैदिक शनि मंत्र-यह शनि देव को प्रसन्न करने का सबसे पवित्र और अनुकूल मंत्र है। इसकी दो माला सुबह शाम करने से शनि देव की भक्ति व प्रीति मिलती है। 
"ॐ शन्नोदेवीरमिष्टय आपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्रवन्तुन:।"
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(3)कष्ट निवारण शनि मंत्र नीलाम्बर- इस मंत्र से अनावश्यक समस्याओं से छुटकारा मिलता है। प्रतिदिन एक माला सुबह शाम करने से शत्रु चाह कर भी नुकसान नहीं पहुँचा पायेगा।
"शूलधर: किरीटी गृघ्रस्थितस्त्रसकरो धनुष्मान्।
चर्तुभुज: सूर्यसुत: प्रशान्त: सदाऽस्तुं मह्यं वरंदोऽल्पगामी॥"
शनि महाराज को प्रसन्न करने के लिए दान का भी बहुत महत्व है अतः शनिवार दान भी करते रहे।
इस दिन महाराज दशरथ द्वारा लिखा गया 'शनि स्तोत्र' का पाठ करके शनि की कोई भी वस्तु, जैसे- काला तिल, लोहे की वस्तु, काला चना, कंबल, नीला फूल दान करने से शनि देव वर्ष भर कष्टों से बचाए रखते हैं।