ALL देश /विदेश राज्य अपराध खेल मनोरंजन/सिनेमा लाइफ स्टाइल धर्म हिन्दी साहित्य शिक्षा कारोबार
इलाज न कराने पर खतरनाक बीमारी बन जाती है सीओपीडी
November 20, 2019 • Dr. Surendra Sharma

कार्यालय संवाददाता

जयपुर। क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी)एक गंभीर बीमारी है जो नजरअंदाज करने पर और खतरनाक हो जाती है। समय के साथ सी.ओ.पी.डी के कारण मृत्यु दर मेंबढ़ोत्तरी हो रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार विश्व मेंहोने वाली सबसे ज्यादा मौतों के कारणों में सी.ओ.पी.डी स-2030 तक तीसरे नंबर पर आ जाएगा। राजस्थान में सीओपीडी सबसे बडे किलर के रूप में सामने आ रहा है। । यदि लक्षणों को सहीसमय पर पहचान कर इलाज कराया जाए तो इस बीमारी कोनियंत्रित किया जा सकता है। वर्ल्ड सीओपीडी-डे (20 नवंबर) के अवसर पर जयपुर के नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शिवानी स्वामी ने इस बीमारी के कारण और बचाव के बारे में लोगों कोजानकारी देकर जागरूक किया। धूम्रपानहसबस बड़ा कारण श्वास रोग विशेषज्ञ डॉ. शिवानी स्वामी ने बताया कि जिस तरहऔद्योगिकीकरण, शहरीकरण हो रहा है उससे होने वाले प्रदूषणऔर बदलती जीवन शैली के कारण सी.ओ.पी.डी की समस्यातेजी से फैल रही है। सी.ओ.पी.डी होने का सबसे बड़ा कारणधूम्रपान (सिगरेट, बीड़ी, जर्दा) है। धूम्रपान करने वाले व्यक्ति औरउस धूएं के आस-पास मौजूद व्यक्ति को भी इससे बराबर खतरारहता है। इसके अलावा गांवों में चूल्हे के धूएं, हुक्का, जर्दे केसेवन से भी सीओपीडी होने की संभावना बढ़ जाती है। इनहेर्ल्स की होती है महत्वपूर्ण भूमिका : आमतौर पर लोगों में यह भ्रांतियां रहती हैं कि इनहेर्ल्स लेनानुकसानदायक होता है लेकिन इसके उलट सीओपीडी में इनहेर्ल्सउपचार के लिए बेहद आवश्यक उपाय है। इससे दवा को पाउडरके रूप में सीधे प्रभावित हिस्से में भेजा जा सकता है जिसकाअसर जल्दी देखने को मिलता है। इसके अलावा कुछ दवाइयांएवं स्टेरॉयड देकर भी मरीज के लक्षणों को नियंत्रित किया जाताहै। यदि लक्षण दिखाई दें तो मरीज को बिना समय गंवाए श्वासरोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिएनिवारू रोड, जयपुर से प्रकाशित। पीआरबी एक्ट के तहत खबरों डॉ. शिवानी ने कहा कि सी.ओ.पी.डी सिर्फ फेफड़ों की ही बीमारीनहीं हैं, यह दिल एवं दिमाग को भी प्रभावित करती है, हड्डियोंमांसपेशियों में कमजोरी होने, वजन गिरने का भी कारण बनसकती है। जिन मरीजों को अस्थमा की समस्या हो और वे उचितइलाज नहीं ले रहे हों, उनका अस्थमा भी सीओपीडी में परिवर्तितहो सकता है। यदि सांस लेने में तकलीफ, दिल की धडकन तेजया धीमी हो, कमजोरी महसूस हो, लंबे समय से सर्दी-जुकाम,बलगम की समस्या को आमतौर पर बुढापे से जुड़ी समस्यादेखकर नजरअंदाज कर देते हैं लेकिन यह सी.ओ.पी.डी केशुरूआती लक्षण हो सकते हैं, जिसके दिखाई देने पर विशेषज्ञ सेपरामर्श लेना चाहिए।