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हर 10 में से 1 व्यक्ति को गंभीर किडनी रोग
March 13, 2020 • Dr. Surendra Sharma

जयपुर। किडनी हमारे शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जो खून को साफ करती है और शरीर से अपशिष्ट पदार्थ निकालती है। विश्व में क्रोनिक किडनी रोग (सी.के.डी.) खतरनाक स्थिति पर है और हर 10 में से एक व्यक्ति कुछ हद तक गंभीर किडनी रोग से प्रभावित है। हाई बीपी और डायबिटीज- व्यस्कों में सीकेडी का सबसे आम कारण है। यह बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है, अगर हम जोखिम कारकों को समझकर उनको नियंत्रण में रखें एवं लक्षण दिखते ही जल्द से जल्द इसका उपचार शुरू कराएं तो क्रोनिक किडनी डिजिज (सी.के.डी.) पर काबू पाया जा सकता है। वर्ल्ड किडनी डे के मौके पर नारायणा मल्टीस्पेशियालिटी हॉस्पिटल, जयपुर में गुरुवार को मरीज जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया जिसमें अस्पताल के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल कुमार कस्वाँ एवं यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमित कोटिया, डॉ. हरीश कस्वां एवं डॉ. मधुसूदन पाटोदिया ने किडनी रोग एवं अंगदान से जुड़ी कई जानकारियां दी। वहीं किडनी दिवस के मौके पर नारायणा हॉस्पिटल की ओर से शहर में मॉर्निंग पार्क, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड जैसे कई सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को स्वच्छ पानी की बोतलें वितरित की गई। साथ ही किडनी रोग से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देने लिए 'पेशंट एज्युकेशन बुकलेट्सभी वितरित की गई।

धीरे-धीरे बढ़ते हैं लक्षणः नारायणा मल्टीस्पेशियालिटी हॉस्पिटल के गुर्दा रोग विशेषज्ञ डॉ. कमल कस्वाँ ने बताया कि प्रारंभिक क्रोनिक किडनी डिजिज में अक्सर कि आमतौर पर किडनी दान करने के डोनर एक किडनी से भी सामान्य जीवन सकते हैं। लक्षण दिखाई नहीं देते। किसी भी लक्षण का अनुभव करने से पहले, व्यक्ति 90 प्रतिशत तक गुर्दे की कार्यप्रणाली खो सकता है। सांस लेने में दिक्कत होना, खून में कमी, यूरीन में झाग आना, उच्च रक्तचाप, जी मचलाना या कम भूख लगने जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। मरीज को लंबे समय तक यूरीन में इंफेक्शन होने पर उसकी किडनी खराब होने की संभावना बढ़ जाती है। उच्च रक्तचाप एवं डायबिटीज किडनी के सबसे बड़े दुश्मन है|

अंतिम चरण में डायलिसिस या ट्रांसप्लांट ही उपचारः इस मौके पर हॉस्पिटल के सीनियर गुर्दा रोग विशेषज्ञ ब्रिगेडियर डॉ. अनुज राजवंशी (से.नि.) ने बताया कि सीकेडी जब अपने अंतिम चरण में होती है तो डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट ही इसका उपचार होता है। किडनी फेलियर के अंतिम चरण वाले मरीजों में ट्रांसप्लांट सबसे अच्छा उपचार का विकल्प है। ट्रांसप्लांट के बाद मरीज लगभग सामान्य जिंदगी जी सकता है। किडनी ट्रांसप्लांट के लिए मरीज की उम्र ज्यादा नहीं होनी चाहिए, गंभीर हृदय रोग, कोई क्रोनिक बीमारी या खराब मानसिक स्थिति नहीं होनी चाहिए।