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हक़ीक़त से निग़ाहें मूँद कर इंसान चलता है- बलजीत सिंह बेनाम
October 16, 2020 • Dr. Surendra Sharma

हकीकत से निगाहें मूदँ कर इंसान चलता है 

                        बलजीत सिंह बेनाम.                                                        हिसार(हरियाणा)

                       मोबाईल:9996266210

 

                        ग़ज़ल

 

तसव्वर से कहाँ हर पल नया चेहरा निकलता है

हक़ीक़त से निग़ाहें मूँद कर इंसान चलता है

 

कभी जब सोचते हैं तब कहीं लावा पिघलता है

चमन का बाग़बाँ ही क्यों सभी कलियाँ मसलता है

 

किसी को चाँद कहने की मिली है ये सज़ा मुझको

नज़र भर कर जो देखूँ चाँद तो दिल मेरा जलता है

 

उसे सहरा की लम्बी दूरियाँ तय करनी पड़ती हैं

अगर क़तरा समंदर से कभी बच कर निकलता है