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दो दिवसीय वेस्ट जोन वाइस चांसलर्स मीट सम्पन्न,
December 12, 2019 • Dr. Surendra Sharma

उपकुलपतियों की नियुक्ति काफी चुनौती भरा काम
डॉ. सुभाष गर्ग


जयपुर, 12 दिसंबर,  विश्वविद्यालयों में कुलपति (वीसी) की नियुक्ति के लिए देश में एक भी फ्रेमवर्क नहीं है। उनकी नियुक्ति एक बड़ी चुनौती है जिसका भारतीय विश्वविद्यालयों को वर्तमान में सामना करना पड़ रहा है। यह बात राजस्थान सरकार में तकनीकी शिक्षा मंत्री डॉ. सुभाश गर्ग ने आज कही। वे आईआईएस (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) में दो दिवसीय एआईयू वेस्ट जोन वाइस चांसलर्स मीट के समापन के अवसर पर मुख्य अतिथि पद से बोल रहे थे।

मंत्री ने आगे कहा कि एआईयू को केंद्र सरकार को सुझाव देना चाहिए कि वीसी की योग्यता और नियुक्ति का तरीका बदलना चाहिए। विश्वविद्यालयों का मापदण्ड वीसी पर निर्भर होता है। कुलपतियों की नियुक्ति में जाति, धर्म और क्षेत्र के विभिन्न लॉबियों को दूर किया जाना चाहिए। डॉ. गर्ग ने छात्रों और फैकल्टीज के साथ बातचीत में अधिक से अधिक समय समर्पित करने के लिए वीसी से आग्रह किया।

राजस्थान सरकार की सचिव, उच्च और तकनीकी शिक्षा, सुश्री शुचि शर्मा (आईएएस) ने कहा कि आज के समय में शिक्षा प्रणाली से मानवीय पहलू गायब है। शिक्षा पाठ्यक्रम को इस तरह विकसित किया जाना चाहिए कि इसमें मानवीय पहलू शामिल हो। उन्होंने यह भी कहा कि गांधी के ट्रस्टीशिप के विचार को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। इन दिनों विद्यार्थियांे द्वारा आत्महत्या किए जाने के संदर्भ में सुश्री शर्मा का कहना था कि एआईयू को परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली पर भी विचार-विमर्श करना चाहिए।

अपने समापन भाषण में एआईयू की सेक्रेटरी जनरल डॉ(श्रीमती) पंकज मित्तल ने कहा कि भारतीय विश्वविद्यालयों की रैंकिंग में सुधार के लिए शिक्षा प्रणाली का अंतर्राष्ट्रीयकरण महत्वपूर्ण है। हर विश्वविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए एक स्पष्ट कटौती नीति, रणनीति और रोडमैप होना चाहिए जिसे विश्वविद्यालय के सिद्धांतों में शामिल किया जाना चाहिए। 

आईआईएस (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी), के वाइस चांसलर डॉ. अशोक गुप्ता ने कहा कि इस दो दिवसीय बैठक में विविध विषयों पर सक्रिय विचार-विमर्श हुआ है। इस बैठक से टेकअवेज संचालन रणनीति के निष्पादन में सहायता करेगा और भारतीय विश्वविद्यालयों की वैश्विक रैंकिंग में वृद्धि करेगा।
इससे पूर्व शैक्षणिक समन्वयक, एआईयू, डॉ. रमा देवी पाणि ने बैठक  की एक रिपोर्ट पेश की, जिसमें उन्होंने दोहराया कि गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के विश्वविद्यालयों के 80 से अधिक कुलपतियों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के वक्ताओं ने भी इस बैठक में भाग लिया।

एआईयू के संयुक्त सचिव डॉ आलोक मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा अपने अनुभव साझा किए। एआईयू के गवर्निंग बॉडी के सदस्य  विवेक साओजी और पूर्व अध्यक्ष, एआईयू और एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, तमिलनाडु के प्रोफेसर संदीप संचेती भी उपस्थित थे।