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दिल्ली में हर साल प्रदूषण होने पर लोगों को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ता है- कांग्रेस
November 20, 2019 • Dr. Surendra Sharma

नई दिल्ली। शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को संसद में दिल्ली के प्रदूषण पर चर्चा हुई। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि जब हर साल दिल्ली में प्रदूषण का मुद्दा उठता है तो फिर सरकार या सदन की ओर से इस मामले पर कोई आवाज क्यों नहीं उठती? आखिर क्यों हर साल लोगों को इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ता है? यह बेहद गंभीर मामला हैतिवारी ने आगे यह भी कहा, "आज यह जरूरी है कि इस सदन की ओर से देश को यह संदेश जाए कि लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि इस मुद्दे पर संवेदनशील और गंभीर हैं। केवल हवा ही नहीं बल्कि हमारी नदियां भी प्रदूषित हो रही हैं। जिस हमारी नदियां भी तरह संसद में स्थायी, प्राक्कलन और लोक उपक्रम समितियां हैं, उसी तरह प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर भी समिति होना चाहिए।" किसान, कश्मीर और जेएनयू पर हंगामाः किसानों की आय, कश्मीर में नेताओं की हिरासत और जेएनयू के मुद्दे पर भी सदन में हंगामा हुआ। कांग्रेस लोकसभा से वॉक आउट कर सांसदों ने गांधी परिवार की सुरक्षा कम दिया। करने पर तानाशाही बंद करो के नारे लगाए उधर, कई सदस्यों ने दोनों सदन में और लोकसभा की वेल में आकर वायु प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जवाब चर्चा के लिए नोटिस दिया। मांगा। इसके बाद गांधी परिवार की सुरक्षा कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने घटाने के मुद्दे पर कांग्रेस और डीएमके ने कहा, "सोनिया और राहुल गांधी सामान्य सुरक्षा पाने वाले व्यक्ति नहीं हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने गांधी परिवार को एसपीजी सुरक्षा प्रदान की थी। गांधी परिवार को 1991 से 2019 तक यह सुरक्षा मिली रही। एनडीए दो बार सत्ता में आया, लेकिन गांधी परिवार का एसपीजी कवर नहीं हटाया गया।" प्रदूषण पर राजनीति से ऊपर उठकर सोचना होगाः तृणमूल तृणमूल कांग्रेस की सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने कहा कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर सोचने की जरूरत है। इस पर राजनीति से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए और मिलकर हल खोजना चाहिए। जलवायु परिवर्तन पर एकजुट होकर लड़ने की जरूरत है। रविवार को दिल्ली में भाजपा के सांसदों मनोज तिवारी, हंसराज हंस और मीनाक्षी लेखी ने प्रदूषण का मुद्दा संसद में उठाया। लेखी ने कहा कि हमारे प्रदेश के सीएम अरविंद केजरीवाल के पास इतना समय नहीं है कि अपने पड़ोसी के राज्यों के साथ बात कर लें।