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बदल चुका है सिनेमा का जायका: तब्बू
January 22, 2020 • Dr. Surendra Sharma

फिल्म इंडस्ट्री, जहां हर कोई ज्ञान बांटने के लिए बेताब रहता है, तब्बू एक खामोशरहस्यमय सी शख्सीयत के रूप में सामने आईं। हालांकि वह दुनिया की तमाम चर्चाओं- हलचलों से अच्छी तरह वाकिफ रहती हैं। 48 वषीर्या तब्बू मानती हैं कि बदलते दौर के साथ खुद भी बदलते रहना बेहद जरूरी है। वह बताती हैं, 'पिछले 10-15 सालों में दुनिया में बहुत कुछ बदला है- राजनीति, अर्थशास्त्रपारिवारिक ढांचा, रिश्ते, प्यार, कला वगैरहवगैरह। ऐसे में सिनेमा जगत में भी बदलाव आना लाजिमी था।' हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में काम कर चुकी तब्बू का मानना है कि फिल्मों में आ रहे बदलावों में चौंकाने वाला कुछ भी नहीं है। वह कहती हैं, 'मैं पिछले कई सालों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हूं। अगर हम एक या दो दशक पुरानी फिल्मों की तुलना आज की फिल्मों से करें, तो ऐसा लगता है कि कई शताब्दियां बीत चुकी हैं। कभी-कभी आप यह समझ नहीं पाते कि आखिर ये बदलाव क्यों और कब आए। कई बार ऐसा भी लगता है कि ये बदलाव अचानक आ गए। पर सच्चाई यह है कि इस तरह के बदलाव लंबे समय से कला जगत में हो रहे थे।' अपनी बात स्पष्ट करते हुए तब्बू कहती हैं, 'इन बदलावों का श्रेय आज की नई पीढ़ी को जाता है। दर्शकों की पसंद बिल्कुल बदल चुकी है।'

तब्बू की आने वाली फिल्म है 'जवानी जानेमन', जिसमें वह सैफ अली खान के साथ नजर आएंगी। आगे वह कहती हैं, 'किसने सोचा था कि 'अंधाधुन' जैसी फिल्म, जिसमें एक सीरियल किलर एक प्रमुख भूमिका में थी, और लगभग हर किरदार स्याह फितरत वाला था, उसे इतना प्यार मिलेगा। मुझे लगता है कि यह सिनेमा में आए बदलाव का सबसे अच्छा उदाहरण है।' . आखिर वह कौन-सी चीज है, जो बतौर एक्टर उन्हें परिभाषित करती है? वह बताती हैं, 'मैं बहुत किस्मतवाली हूं कि मुझे इतने जटिल किरदार निभाने का मौका मिला। इस किस्म के किरदारों में मन पूरी तरह रम जाता है। ये किरदार अकसर मुझे मानसिक रूप से थका देते हैं। पर यह रचनात्मक प्रक्रिया का हिस्सा है। इनके सफर का हिस्सा बनकर मुझे बहुत खुशी होती है।'