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10 दिवसीय पिंकसिटी फेस्टिवल का दूसरा दिन
January 22, 2020 • Dr. Surendra Sharma


• 29 जनवरी तक
• शिल्प, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और रंगमंच का संयोजन
• कल से म्यूरल पेंटिंग वर्कशॉप आयोजित की जाएगी

जेकेके में लोक नृत्य, नाट्य व संगीत प्रस्तुतियों का मिश्रण

जयपुर, 21 जनवरी। जवाहर कला केंद्र (जेकेके) में चल रहे 10 दिवसीय पिंकसिटी फेस्टिवल के दूसरे दिन शिल्पग्राम में रंगारंग लोक नृत्यों, नाट्य व संगीत प्रस्तुतियों का संयोजन देखने को मिला। साथ ही, आगंतुकों को हस्तनिर्मित वस्तुओं विभिन्न हस्तशिल्प कलाओं के बारे में जानने का मौका मिला।

लोगों ने शाम को यहां बीकानेर की प्राचीन लोक कला ‘रम्मत‘ का वैभव देख उसे खूब सराहा। इस प्रस्तुति में नागौर के अमर सिंह राठौड़ के शाही दरबार की झलक दिखाई गई। इसके कलाकारों में उमेश, रामनारायण, हरिनारायण, आनंद, गौतम, विशोधा, बाबूलाल व सुनील शामिल थे। इनके अलावा अक्षय (हारमोनियम) और विजय (नगाड़ा) का भी सहयोग रहा।

इसके बाद फेस्टिवल में जयपुर के गोपाल सिंह ने जेकेके परिसर को नगाड़ा की धमचक ने गुंजायमान कर दिया। इसके साथ ही मुश्ताक खान के ‘मांगणियार सिम्फनी‘ की ओर से विशेष प्रस्तुति दी गई। उन्होंने सिम्फनी द्वारा लोकप्रिय राजस्थानी लोक गीत ‘निम्बूड़ा निम्बूड़ा‘ और ‘केसरियो हजारी गुल रो फूल‘ गाया गया। दर्शकों ने राजस्थान के विभिन्न पारंपरिक नृत्यों व संगीत का आनंद भी उठाया, जिनमें चूरू के लादूराम की डेरू, बाड़मेर के पारस की लाल अंगी गैर, डीग के अशोक की मयूर, उदयपुर के प्रेमप्रकाश की भवई और अलवर के यूसुफ की मनोरंजक भपंग प्रस्तुति शामिल थी।

जेकेके में दोपहर में राज्य के विभिन्न भागों की लोक कला की प्रस्तुतियां दी गई। आगंतुकों ने कठपुतली शो का आनंद लिया जिसमें कठपुतलियां चमकीली व रंग-बिरंगी पोशाक पहने हुए थीं। ‘बहरूपिया’ बने युवक-युवतियों को कृष्ण, शिव जैसे पौराणिक किरदारों व शिकारी सहित विभिन्न रूपों में तैयार किया गया था। फेस्टिवल में जादूगर ने आगंतुकों के लिए मनोरंजक श्भ्रमश् का प्रदर्शन किया गया।

22 जनवरी के कार्यक्रम

फेस्टिवल के तीसरे दिन (22 जनवरी को) दोपहर 2 बजे से शाम 5.30 बजे तक कठपुतली, बहुरूपिया, जादूगर, अलगोजा प्रस्तुति, भोपा गायन एवं कच्छी घोड़ी की प्रस्तुतियां दी जाएगी। शाम 4 बजे से शाम 5.30 बजे तक ‘कुचामणी ख्याल’ की प्रस्तुति होगी। शाम 6.30 बजे से रात 8.30 बजे तक जालोर के मयूर, गरासिया, लंगा गायन, भपंग, चरी एवं जालोर के बिजली गेर प्रस्तुत किए जाएंगे।

कल (22 जनवरी) से आयोजित की जाएगी म्यूरल पेंटिंग वर्कशॉप
जवाहर कला केंद्र (जेकेके) की ओर से यहां के ग्राफिक स्टूडियो में कल (22 जनवरी) से म्यूरल पेंटिंग वर्कशॉप आयोजित की जाएगी। ‘स्किलशेयर फ्रॉम लिविंग मास्टर्स‘ श्रृंखला के तहत आयोजित की जा रही इस नौ दिवसीय वर्कशॉप में श्री अनिल कुमार एम. वी. और केरल के श्री रवीन्द्र चंदनथोपे द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को केरल की पारंपरिक म्यूरल आर्ट सिखाई जाएगी, जो ड्राइंग व रंगों की योजना की अनूठी शैली वाली फ्रेस्को पेंटिंग है। इन पेंटिंग्स में पौराणिक कथाओं व किंवदंतियों के दृश्यों व विषयों को दर्शाया जाता है। ये मुख्य रूप से मंदिरों व महलों की दीवारों पर बनाई जाती थी। म्यूरल पेंटिंग वर्कशॉप 30 जनवरी तक चलेगी।