ALL देश /विदेश राज्य अपराध खेल मनोरंजन/सिनेमा लाइफ स्टाइल धर्म हिन्दी साहित्य शिक्षा कारोबार
*कोडरमा के गौरव है मुनि प्रांजल सागर  महाराज* 
August 29, 2020 • Dr. Surendra Sharma

*कोडरमा के गौरव है मुनि प्रांजल सागर  महाराज*        झुमरी तिलैया /कोडरमा । जैन धर्म का महापर्व पर्यूषण का सातवां दिन आज उत्तम तप धर्म के रूप में मनाया गया सर्वप्रथम प्रातः भगवान का अभिषेक और शांति धारा विश्व शांति मंत्रों के द्वारा मंत्रिक जल के द्वारा किया गया तत्पश्चात सैकड़ों घरों के लोगों ने उत्तम तप धर्म की पूजा की आज अपने घर में उत्तम तप धर्म की विशेष पूजा जैन युवक समिति के मंत्री सुमित जैन सेठी ने अपने परिवार वालों के साथ की इस पूजा में सरला जैन सेठी संगीता जैन सेठी ममता जैन सेठी अलका जैन सेठी आशिका सेठी अजय शेट्टी संजय सेठी प्रशम सेठी ने बड़े ही धूमधाम से अपने घर को मंदिर बना कर पूजा किया तत्पश्चात सैकड़ों घरों के लोगों ने झुमरी तिलैया के पानी टंकी रोड में ही जन्म लेने वाले दिगंबर जैन मुनि प्रांजल सागर जी महाराज का प्रवचन और उपदेश को सुना जैसा कि मालूम हो कि आज से 10 वर्ष पहले उन्होंने जैन संत आचार्य विनिश्चय सागर जी गुरुदेव से मुनि दीक्षा प्राप्त की थी जैन मुनि प्रांजल सागर जी महाराज ने उत्तम तप धर्म की चर्चा करते हुए कहा कि अपनी इच्छाओं का त्याग करना ही तप है तप यानि अपने मन को वश में करना है तप के द्वारा ही व्यक्ति अपने विषय वासनाओं पर काबू प्राप्त कर सकता है जो तप इच्छाओं को त्याग कर किया जाता है स्वार्थ की भावना नहीं रहती है वहीं पर व्यक्ति परम पद को प्राप्त कर सकता है जो व्यक्ति जितना अधिक तप करेगा वह व्यक्ति उतना अधिक चमकेगा प्रकाशित होगा जिस प्रकार सोना को जितना पीटा जाता है उतना अधिक चमकता है सुंदर लगता है तप इच्छाओं की वृद्धि ना करने का मार्ग है बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों ने अपनी इच्छाओं का निरोध कर तप किया और साधना का मार्ग अपनाकर ही अपने जीवन को सफल बनाया मनुष्य अपनी अज्ञानता और स्वार्थ की भावना को त्याग कर तप करेगा तभी निराकुलता को प्राप्त कर सकता है निवर्तमान वार्ड पार्षद पिंकी जैन ने इस मौके पर कहा कि झुमरी तिलैया कोडरमा की धरती ही तपस्थली है क्योंकि कोडरमा की धरती से ही यहां से दो जैन मुनि और एक जैन साध्वी बनी है सभी कोडरमावासियों और जैन समाज झुमरीतिलैया के लिए बहुत गर्व की बात है की झुमरी तिलैया में ही जन्म लिए जैन मुनि प्रांजल सागर जी महाराज का आशीर्वाद और वाणी को सुनने का हम लोगों को मौका मिला जैन मुनि प्रांजल सागर जी महाराज अपने तप और साधना के बल पर ही आज आचार्य विनिश्चय सागर जी महाराज के संघ में शामिल है और धर्म प्रभावना कर रहे हैं मैं जैन संत आचार्य विनिश्चय सागरजी गुरुदेव को शत-शत नमन करती हूं और साथ ही साथ जैन मुनि प्रांजल सागर जी महाराज के माता पिता महावीर जैन कासलीवाल और कुसुम देवी जैन कासलीवाल को नमन करती हूं जिन्होंने ऐसे पुत्र को जन्म दिया और झुमरीतिलैया शहर का नाम रोशन किया इसी झुमरीतिलैया की धरती से जैन मुनि निर्विकल्प सागर जी महाराज ने मुनि दीक्षा ली जो समाज सेवी राष्ट्रपति पुरस्कार पदक विजेता सुरेश झाझंरी के दादाजी है प्रशममति माताजी ने जैन साध्वी की दीक्षा ली उनके पुत्र जयकुमार जैन गंगवाल इसी झुमरीतिलैया चांडक कंपलेक्स में रहते हैं निर्वतमान वार्ड पार्षद पिंकी जैन ने कहा हम सभी जैन समाज के लोग और शहरवासी के लिए बहुत गौरव की बात है कि इन लोगों ने संत और साध्वी बनकर अपनी इच्छाओं का त्याग किया अपने घर द्वार परिवार को छोड़कर तप और साधना के द्वारा सन्यास ले कर आत्म साधना की ओर कदम बढ़ाया अपनी इच्छाओं का त्याग करना ही तप है जैन समाज के अध्यक्ष विमल जैन बड़जात्या और मंत्री ललित जैन सेठी ने कहा कि झुमरी तिलैया जैन समाज आज उत्तम तप के दिन ऐसे सभी संत साध्वी को नमन करती है और पर्युषण महापर्व की शुभकामनाएं व्यक्त करती है।