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‘हेल्प इन सफरिंग‘ की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर जयपुर में आरम्भ होगी ‘ऑल इंडिया स्क्रैप मैटल आर्ट सिम्पोजियम‘
February 26, 2020 • Dr. Surendra Sharma

जयपुर, 25 फरवरी। हेल्प इन सफरिंग, जयपुर की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर होटल क्लार्क्स आमेर में ऑल इंडिया स्क्रैप मैटल आर्ट सिम्पोजियम का आयोजन किया जायेगा। 26 फरवरी से 7 मार्च तक चलने वाली इस सिम्पोजियम में देशभर से आए दस कलाकार स्क्रैप मैटल का उपयोग कर भारतीय जानवरों एवं पक्षियों की कलाकृतियां बनाएंगे। सिम्पोजियम के समापन पर कलाकारों द्वारा बनाई गई इन कलाकृतियां को इंटरनेशनल ऑनलाइन ऑक्शन के जरिए बेचा जाएगा। इस ऑक्शन से प्राप्त धनराशि को ‘हेल्प इन सफरिंग‘ संस्था को चैरिटी में दिया जाएगा। आज यह जानकारी हेल्प इन सफरिंग की मैनेजिंग ट्रस्टी, सुश्री टिम्मी कुमार ने होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में दी। 

सुश्री टिम्मी कुमार ने आगे कहा कि ‘सिम्पोजियम को यादगार बनाने व जयपुर शहर के लोगों में जागरूकता उत्पन्न करने हेतु टॉक्स का आयोजन भी किया जाएगा। सिम्पोजियम में अंकित पटेल, सन्नी श्रीधर, रतन साहा, हंसराज चित्रभूमी, अप्पलाराजू सुरकला, रमनदीप, प्रफुल सिंह, सूर्या व रितु सिंह, पद्मिनी सिंह चौहान व योगेश प्रजापति जैसे प्रसिद्ध कलाकार शामिल होंगे।

इस अवसर पर कलाकार अंकित पटेल ने कहा कि सिम्पोजियम के बाद बच्चों के लिए 14 दिवसीय कैम्प भी आयोजित किया जाएगा। इस कैम्प में 10 स्कूलों के 30 स्टूडेंट शामिल होंगे। इस कैम्प की बची हुई सामग्री का उपयोग कर बच्चे स्क्रैप फोरेस्ट का एक स्थाई इंस्टालेशन बनायेंगे। रीड्यूस, रीयूज व रीपरपज के सिद्धांतों पर आधारित सस्टेनेबल जीवनशैली को बढ़ावा देना इस इंस्टालेशन का मुख्य उद्देश्य है।

गुजरात से आए कलाकार, सन्नी श्रीधर ने बताया कि राजस्थान का मौसम स्क्रैप आर्ट के बेहद अनुकूल है क्यों कि यहां का मौसम शुष्क है जिससे मैटल का करोज़न नहीं होता और आर्ट वर्क अधिक समय तक बने रहते हैं। 

कलाकार प्रफुल सिंह ने जानकारी दी सिम्पोजियम के दौरान वे रॉड एवं पाईप जैसे स्क्रैप मैटेरियल का उपयोग कर इंडियन राइनोसरस का इंस्टालेशन बनायेंगे। 

कलाकार हंसराज चित्रभूमी ने कहा कि उन्हें स्क्रैप में वेस्ट नहीं बल्कि कला दिखाई देती है। हंसराज ने आगे बताया कि सिम्पोजियम में आर्ट इंस्टालेशन बनाने के लिए उन्होंने क्लार्क्स आमेर के विभिन्न वेन्यूज से 1 टन से अधिक स्क्रैप इकट्ठा किया है। इस सिम्पोजियम में फाईन आर्टस् के स्टूडेंट भी भाग ले कर स्क्रैप से कलाकृतियां बनाना सिखेंगे।

हेल्प इन सफरिंग के बारे मेंः

हेल्प इन सफरिंग एक रजिस्टर्ड भारतीय चैरिटेबल ट्रस्ट है, जो भारत में जानवरों के कल्याण के लिए काम कर रहा है। 1980 में ब्रिटिश पशु प्रेमी, सुश्री क्रिस्टल रॉजर्स द्वारा पीड़ित जानवरों व सभी जीवों की मदद करने के लिए जयपुर, राजस्थान में सीमित संसाधनों के साथ इस वेटनरी हॉस्पिटल व शेल्टर की स्थापना की गई थी।

हेल्प इन सफरिंग भारत में पशुओं के कल्याण के लिए कार्यरत एक प्रमुख चैरिटी है, जिसने गत 12 वर्षों से जयपुर को रेबीज से मुक्त रखे हुए है और अपने एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम के जरिए शहर के आवारा जानवरों की आबादी को नियंत्रित रखे हुए है। संस्थान को इसके द्वारा 25 वर्ष से किए जा रहे अच्छे कार्यों के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है। हेल्प इन सफरिंग का एनिमल रेस्क्यू प्रोग्राम प्रत्येक दिन 35-40 जानवरों का इलाज करता है।

बीमार, दर्दनाक चोटों से ग्रस्त, दुर्व्यवहार व भूख या अपने मालिकों के परित्याग के शिकार पालतू व आवारा जानवरों को हेल्प इन सफरिंग की ओर से मुफ्त, गुणवत्तापूर्ण, आपातकालीन चिकित्सा एवं सर्जिकल देखभाल प्रदान की जाती है।

इसे कई उपलबधियां पहली बार हासिल करने का श्रेय है, जिनमें 25 वर्ष पुराने एनिमल बर्थ कंट्रोल शामिल है, जिसने शहर को पिछले 12 वर्षों से शहर को रेबीज मुक्त बना रखा है। संस्थान की ओर से जयपुर के निकट बस्सी में खास विशेषज्ञता वाला कैमल रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां बीमार, बूढ़े व घायल ऊंटों की सेवा की जाती है।

इस संगठन को अत्यंत समर्पित व दयालु कर्मचारियों की टीम द्वारा चलाया जाता है। इसके पास बीमार व घायल पशुओं को संभालने के लिए 35 प्रशिक्षित स्टाफ सदस्य, पांच रेस्क्यू एंबुलेंस और दो मोबाइल क्लिनिक वाहन हैं। इसके द्वारा प्रशिक्षित पशु चिकित्सक के मार्गदर्शन में एनिमल वेलफेयर प्रोजेक्ट्स संचालित किए जा रहे हैं। इसके परिसर में जानवरों के लिए शांतिपूर्ण वातावरण और हरा-भरा प्राकृतिक आवास है।

हेल्प इन सफरिंग, जयपुर का हेल्प इन सफरिंग, यूके फैडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइनेशंस एनिमाक्स-सेकर्स, फ्रांस लेस एमिस सूइस डु रिफ्यूज, स्विट्जरलैंड और वर्किंग फॉर एनिमल्स, ऑस्ट्रेलिया के साथ जुड़ाव है।