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‘भारत के विभाजन के खिलाफ थे गांधीजी‘- राजमोहन गांधी
January 16, 2020 • Dr. Surendra Sharma

-- राजस्थान के राज्यपाल, कलराज मिश्र थे मुख्य अतिथि

जयपुर, 15 जनवरी। महात्मा गांधी हमेशा से भारत के विभाजन के विरोध में थे। विभाजन को रोकने के लिए उन्होंने औरों की तुलना में सबसे अधिक प्रयास किए थे। गांधीजी ने लोगों के मध्य सोहार्द एवं एकता का संदेश फैलाने के लिए भारत के विभिन्न हिस्सों के गांवों में दौरा किया। उन्होंने हमेशा देश में नफरत मिटाने की कोशिश की। गांधीजी ने लोगों को किसी महत्वपूर्ण निर्णय लेने में दुविधा में गरीबों के बारे में सोचना सिखाया और उन्होंने लोगों को यह अहसास दिलाया कि सिर्फ भारत ही स्वतंत्र नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रत्येक भारतीय को भी स्वतंत्र होना चाहिए। उन्होंने लोगों को निड़र व बहादुर बनना सिखाया और अहिंसा के सही अर्थ के बारे में जागरूक किया। महात्मा गांधी के पौते और प्रसिद्ध बायोग्राफर एवं इतिहासकार, श्री राजमोहन गांधी ने बुधवार को ‘अंडरस्टेंडिंग गांधी‘ विषय पर अपने मुख्य भाषण के दौरान यह जानकारी दी। वे जयपुर में होटल क्लार्क्स आमेर में महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती और क्लार्क्स ग्रुप ऑफ होटल्स के संस्थापक, श्री बाबू बृजपाल दास के फाउंडर्स डे के कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। 

उन्होंने आगे कहा कि इस बात में कुछ हद तक सच्चाई है कि गांधीजी ने अपने परिवार को उतना समय नहीं दिया जितना वो आमजन को देते थे। ऐसा शायद इसलिए था, क्योंकि उन्होंने पूरे भारत को ही अपने परिवार के रूप में अपनाया था। लेकिन इसके बावजूद महात्मा गांधी अपने परिवार एवं अपने पोते-पोतियों से बहुत प्यार करते थे। ‘राष्ट्रपिता‘ के रूप में उन्होंने देश के सभी बच्चों को स्वयं के बच्चे माने और उन्हें स्वयं अपने परिवार के साथ व्यतीत करने वाले समय का बलिदान करना पड़ा। उनके परिवार के सदस्य के रूप में हमने यह महसूस किया कि भले ही गांधीजी हमारे खून में हैं, लेकिन उनकी आत्मा देश के सभी बच्चों में निवास करती है।

राजस्थान के राज्यपाल श्री कलराज मिश्र ने कहा कि गांधी ने हमें सिखाया कि हम किसी से कम नहीं हैं और अपने मन में हीन भावना को स्थान देना अपराध के समान है। उन्होंने सत्याग्रह एवं अहिंसा की शक्ति के दम पर ब्रिटिश साम्राज्य से आजादी दिलवाई। सत्याग्रह कमजोर लोगों के लिए नहीं, बल्कि बहादुर और मजबूत लोगों के लिए है। गांधी ने हमेशा युवाओं व भारतीयों में स्वावलंबन (आत्मनिर्भरता) की भावना जाग्रत करने की कोशिश की। यह स्वाभिमान, स्वदेशी और ग्राम स्वराज का संयोजन था। बापू ने हमें अपने समाज के दोषों (सिद्धांतविहीन राजनीति, नैतिकता के बिना व्यापार, चरित्र के बिना कर्म और मानवता के बिना विज्ञान) से अवगत करवाया। इससे पूर्व राज्यपाल ने यहां उपस्थित सभी व्यक्तियों को ‘भारतीय संविधान की प्रस्तावना‘ और भारत के ‘मौलिक अधिकार‘ का पाठ करवाया।

इससे पहले, प्रख्यात आचार्य श्रीवत्स गोस्वामी ने क्लार्क्स आमेर के संस्थापक श्री बाबू बृजपाल दास के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला। 

इस अवसर पर समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देने वाले 5 प्रसिद्ध व्यक्तियों को राज्यपाल; श्री राजमोहन गांधी; होटल क्लार्क्स आमेर के ऑनर, श्री अपूर्व कुमार एवं सुश्री राजेश्वरी कुमार द्वारा सम्मानित किया गया। इसके तहत हैल्प इन सफरिंग के डॉ. जैक रीस; उमंग की निदेशक, सुश्री दीपक कालरा; जयपुर विरासत फाउंडेशन की सुश्री फेथ सिंह; सुप्रसिद्ध लेखिका, सुश्री धर्मेंद्र कंवर एवं प्रसिद्ध आई-सर्जन, डॉ. शमशेर चंद भंडारी।

स्वागत भाषण सुश्री उपासना कुमार द्वारा दिया गया जबकि सुश्री अंकुर कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया। टॉक सैशन के पश्चात श्री राजमोहन गांधी एवं स्टूडेंट्स के साथ इंटरेक्टिव क्वेश्चन-आंसर सैशन भी हुआ। 

इससे पूर्व शांति एशियाटिक स्कूल के स्टूडेंट्स द्वारा राष्ट्रीय गान के विशेष एक्शन गीत के साथ कार्यक्रम की शुरूआत हुई। कार्यक्रम में 30 स्कूलों के लगभग 1000 स्टूडेंट्स शामिल हुए। इस अवसर पर प्रसिद्ध आचार्य श्रीवास्तव गोस्वामी भी उपस्थित थे।